A digital magazine on sexuality in the Global South

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सेक्स टॉय? हाँ क्यों नहीं, पर किसी को पता ना चले

जब मैंने पहली बार भारतीय बाजार में सेक्स टॉय संबंधित जरूरतों को पूरा करने का फैसला किया, तो मुझे एक बात पता थी - मेरे लिए सबसे बड़ी चिंता गोपनीयता बकरार रखने की होगी। मैं लोगों को आनंद पाने के लिए और अपने स्वयं की यौनिकता का पता लगाने के लिए स्वतंत्र महसूस करने के…

नकली या फ़ेक पहचान के साथ ऑनलाइन होना – युवा महिलाओं द्वारा एक से अधिक प्रोफ़ाइल बना, सोशलसोशल मीडिया पर आत्म-अभिव्यक्ति करना

अपनी एम. फिल. की थीसिस के लिए मैंने “सेल्फ़ी लेने और सोशल मीडिया की ओर युवा महिलाओं के आकर्षण” के विषय को चुना था। मेरे ऐसा करने के पीछे कई कारण थे। सबसे महत्वपूर्ण कारण यह था कि मैं युवा महिलाओं के मन में टेक्नालजी, आत्म-अभिव्यक्ति तथा शरीर के प्रति लगाव को समझना और डॉकयुमेंट…

किशोर यौनिकता – सामाजिक मूल्य और व्यावहारिक मतभेद

किशोरों में यौनिकता विषय पर चर्चा करना आरंभ करने पर कानून, आयु, मान्यताएँ व स्वास्थ्य जैसे अनेक ऐसे मुद्दे भी उठ खड़े होते हैं जो बहस की विषयवस्तु हैं। इसके साथ जुड़ा एक और मुद्दा यह भी होता है कि क्या किशोरों को, उनकी आयु को ध्यान में रखते हुए, यौनिक समझा जाए अथवा नहीं।…

इंटरव्यू – जैस्मिन जॉर्ज 

शिखा आलेय  जैस्मिन जॉर्ज TEDx स्पीकर हैं, अधिवक्ता हैं और भारत में यौन एवं प्रजनन अधिकारों की पैरोकार हैं। ये Hidden Pockets की संस्थापिका हैं और इस समय यौनिकता और दूसरे मुद्दों पर हो रहे वार्तालाप को प्रबंधित करती हैं। कानून और तकनीक के वैकल्पिक उपायों के प्रयोग द्वारा यौनिकता को समझ पाने में इनकी…

नीलम और एक अकारण सा हंगामा

“मेरी बेटी के सेक्स को कम करने के लिए कुछ कीजिए न डाक्टर बाबू” यह एक पिता की दरख्वास्त थी मुझसे। वह दिन भी दूसरे दिनों की तरह ही ओपीडी में एक व्यस्त दिन था और क्लीनिक में लोगों की भीड़ थी। वह व्यक्ति कहना चाहते थे कि मैं उनकी बेटी की सेक्स की इच्छा…

सब कुछ पर्दे में है

शुभांगी कश्यप  एक ऐसे समाज में जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा अपनी यौनिकता की खुली अभिव्यक्ति कर पाना प्रतिबंधित हो और जहाँ जेंडर के बारे में पितृसत्ता के स्थापित मानकों को ही अपनाया जाता हो, वहाँ इस संबंध में किसी भी तरह के प्रयोग कर पाना आसान नहीं होता। स्कूलों में बच्चों के लिए व्यापक यौनिकता…
Cover Photo: Pixabay

संदिग्ध महिलाएँ 

मैं उत्तरी दिल्ली के एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में एक छोटे तंग से ऑफिस में हूँ। यहाँ बाहर किसी भी कंपनी या व्यक्ति का नाम नहीं लिखा है। मैं एक लैपटाप कम्प्युटर पर आँखें गढ़ाए एक विडियो को देखने और समझने की कोशिश में लगी हूँ। विडियो में दिखाई दे रहे दृश्य धुंधले हैं और कुछ…
Image of a hostel room

स्वीकार्यता, स्वतन्त्रता और महिलाओं का हॉस्टल 

आज मुझे लड़कियों के अपने हॉस्टल से निकले हुए तीन वर्ष हो चुके हैं, और मुझे लगता है कि हॉस्टल जीवन में मिली सभी सीखें आज भी मेरे यौनिक जीवन को सही दिशा देने में कारगर साबित हो रही हैं।
An image of Devdutt Pattanaik

इंटरव्यू – देवदत्त पटनायक

देवदत्त पटनायक आधुनिक समय में, प्रबंधन, प्रशासन प्रक्रिया और नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में पौराणिक विचारों की प्रासंगिकता के विषय पर लिखते हैं। डाक्टरी की पढ़ाई और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होने 15 वर्ष तक स्वास्थ्य देखभाल उद्योग और दवा निर्माता कंपनियों के साथ काम किया।

मर्दानगी के सामाजिक आधार

मर्दानगी के निर्माण में शर्मिंदगी की भूमिका, और नायक के खुद के विकास के लिए आत्मविश्वास और क्षमता पर इसका प्रभाव, विशेष रूप से उनके प्रारंभिक वर्षों में, खूबसूरती से सामने लाया गया है।
A piece of paper signifying a letter

एक ख़त मेरे नाम जब मैं १६ की थी

इसलिए, तुम्हारे आज के स्वः या अवतार के रूप में, मैं तुम्हें अपनी क्षमताओं में विश्वास रखने के लिए प्रोत्साहित करती हूँ, अपने सपनों पर केंद्रित रहना, एक स्वाभाविक मूल्य प्रणाली विकसित करना जो हठधर्मिता से मुक्त हो, हमेशा जिज्ञासु बनी रहना और निरंतर सीखने की अपनी इच्छा का पोषण करना, और अपना जीवन स्वतंत्र रूप से और पूरी तरह से जीना।
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