A digital magazine on sexuality in the Global South

हिन्दी

चुनौती पहुँच की – इच्छाएँ, कल्पनाएँ और विकलांगता के साथ रह रहे लोग

प्रत्येक फैंटसी या कल्पना एक बेहद ही निजी अनुभव होती है, भले ही यह मन में ही रखी जाए या दूसरों को बतायी जाए, और चाहे उसका सम्बन्ध यौनिकता से हो या नहीं। कोई व्यक्ति किस तरह से अपनी यौनिकता (या फिर औरों की भी) का निर्माण कर पाते हैं और यौन आनंद और इच्छाओं को किस तरह…

महिला मानवाधिकार रक्षकों के स्वयं की देखभाल और स्वास्थ्य रक्षा को सक्रियतावाद में राजनीतिक मुद्दे के रूप में देखना

वेरोनिका विडाल व् सुज़न टोलमे द्वारा संपादकीय नोट – इन प्लेनस्पीक के इस अंक में हम ‘समुदाय एवं यौनिकता’ के विभिन्न आयामों को देख रहे हैं। जहाँ अपने समुदायों की पहचान करना और उनमें अपने लिए जगह बनाना एक विशिष्ट आयाम है, वहीँ इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इन समुदायों…
hum apace hai kaon film still

हम आपकी हैं समधन

शुरुआत में ही स्वीकार लेता हूँ की मुझे शादियों का बहुत शौक़ है।   जब अपनी राजनैतिक सोच और व्यक्तिगत शौक़ में उत्तर-दक्षिण का अंतर हो तो आख़िर क्या किया जाए? पर सोच और आनंद देने वाले शौक़ का अंतर कभी-कभी इतना स्पष्ट नहीं होता। विवाह आयोजनों के दौरान नृत्य कोरियोग्राफी करने (जी हाँ, यह…

पहली बार इंटरनेट से जुड़ते लोग

फोटोग्राफ़र लॉरा डे रेनल ऐसे संगठनों की कोशिशों को कैमरे में क़ैद कर रही हैं, जो लोगों को पहली बार इंटरनेट से जोड़ने में मदद कर रहे हैं. मेडागास्कर के स्कूली छात्रों ने पहली बार इंटरनेट पर विकीपीडिया देखा और उससे मिली जानकारी को ब्लैकबोर्ड पर लिखा. लगभग एक दशक पहले 'वन लैपटॉप पर चाइल्ड'…

अगर इन्टरनेट का अस्तित्व ही न होता तो?

अगर इन्टरनेट न होता, तो मुझे लगता है कि मैं खुद में बहुत ही असुरक्षित महसूस करती। इस बात से आप कोई अन्य अर्थ न निकालें – यहाँ मेरी बात में ज़्यादा ज़ोर ‘असुरक्षित’ से अधिक ‘बहुत ही’ पर है। इसी बात को दुसरे पहलु से देखें तो इसका अर्थ यह निकलता है कि इन्टरनेट…

क्या ‘धंधा’ (यौनकर्म) भी काम होता है? – भाग II

सम्पादकीय नोट : इस लेख का पहला भाग अप्रैल के पहले संस्करण में प्रकाशित हुआ था सेक्स वर्कर के अधिकारों के लिए आन्दोलन से प्राप्त सीख क्या धंधा करना भी काम है? क्या व्यवसाय करना काम है? क्या ऐसा कोई व्यवसाय जिसमे सेक्स सेवाएं प्रदान की जाती हों, काम की परिभाषा में शामिल किया जा…

प्रजनन प्रौद्योगिकी – एक नारीवादी विश्लेषण

रुपसा मल्लिक द्वारा लिखित सोमिंदर कुमार द्वारा अनुवादित पिछले दो दशकों से प्रजनन प्रौद्योगिकी (रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी आरटी)[1] का उपयोग आम तौर पर महिलाओं के जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है और महिलाओं को इसका उपयोग करना ही होता है। विभिन्न प्रकार की नई और पुरानी प्रजनन प्रौद्योगिकी के उपलब्ध होने की बढ़ी जानकारी…

क्या ‘धंधा’ (सेक्स वर्क) भी काम होता है? – भाग १

किसी व्यस्क व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा से पैसों के भुगतान के बदले दी जाने वाली यौन सेवाओं को सेक्स वर्क (यौन कर्म या आम बोलचाल की भाषा में धंधा करना) कहते हैं। सेक्स वर्क की इस परिभाषा का कौन सा भाग ‘काम’ के बारे में हमारी सोच का उल्लंघन करता है? क्या पैसे के बदले…

महिलाओं का विवाह पश्चात् ‘प्रवसन’ और उससे जुड़े कुछ मुद्दे

यूँ तो विवाह और उससे जुड़े महिलाओं के ‘स्थान परिवर्तन’ को ‘प्रवसन’ का दर्ज़ा दिया ही नहीं जाता है, इसको एक अपरिहार्य व्यवस्था की तरह देखा जाता है जिसमें पत्नी का स्थान पति के साथ ही है, चाहे वो जहाँ भी जाए। पूर्वी एशियाई देशों में, १९८० के दशक के बाद से एक बड़ी संख्या में महिलाओं के विवाह पश्चात् प्रवसन का चलन देखा गया है जिन्हें ‘फॉरेन ब्राइड’ या विदेशी वधु के नाम से जाना जाता है।
बाल विवाह

बाल और जल्द विवाह पर एक विश्लेषण

कम उम्र में विवाह और बाल विवाह एक बेहद विखंडित और असमान समाज का लक्षण है। जब भी यह पूछा गया कि लोग अपने बच्चों की कम उम्र में शादी क्यों करते हैं तो “दहेज़”, “गरीबी” और “यौन हिंसा का डर” आदि कारण सबसे ज़्यादा सुनाई दिए।
मानसिक स्वास्थ्य

अपने मन को वापस लेने का समय आ गया है

ऑड्रे लार्ड ने एक बार कहा था, “अपनी देखभाल करने का ये मतलब नहीं कि मैं स्वार्थी हूँ, देखभाल स्वयं की रक्षा करना है और यह एक सियासी संघर्ष है”। एक नारीवादी के रूप में मैंने हिम्मत रखने और साहस के मूल्य को सीखा है – मुश्किलों से लड़ना और उनसे आगे/बाहर निकलना। जब भी…
आसरा टेलीफोन हेल्पलाइन

टेलीफोन के दूसरी ओर उम्मीद की किरण : आत्महत्या रोकने के लिए आसरा की हेल्पलाइन सेवा के अनुभव

जॉनसन थॉमस [संपादक की ओर से: स्वयं की देखभाल करने का सीधा मतलब है अपनी मर्ज़ी से कोई भी ऐसा फैसला करना या कदम उठाना जो हमारी शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक सेहत की देखभाल के लिए हो। पर स्वयं के लिए मदद माँगना एक बहुत ही कठिन काम हो सकता है। क्योंकि ज़्यादातर इसे कमज़ोरी…
x