A digital magazine on sexuality in the Global South

हिन्दी

सावित्रीबाई फुले: ज़माने को बदला अपने विचारों से

This post was originally published here. हम अंदाज़ा लगा ही सकते हैं कि जब दलितों का आज भी इतना शोषण होता है तो आज से 150 साल पहले क्या हाल रहा होगा। ऐसे में ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने इनके हकों की बात उठाई। पति-पत्नी की इस जोड़ी ने मांगा और महार जातियों के बीच काम किया। महाराष्ट्र…

यौन संबंध और समाज – अभिव्यक्ति की कल्पना 

मानव जीवन का एक अभिन्न अंग है, यौनिकता। यौनिकता केवल शारीरिक या भौतिक स्तर पर ही सीमित न होकर हमारी सोच, अभिव्यक्ति और व्यवहार नीतियों को भी संबोधित करती है। क्योंकि मनुष्य केवल सामाजिक, राजनितिक, आर्थिक आदि न होकर लैगनिक भी होता है, इसलिए यौन संबंध में रुचि हमें लुभाती है और आकर्षित करती है। हमारे भीतर…

दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश – आदर्शवादी संबंधों की दास्तान 

दीप्ति नवल द्वारा निर्देशित फिल्म, दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश, (वर्ष 2009, नेटफ्लिक्स पर 2019 में रीलीज़) कमोबेश एक यथार्थवादी फिल्म है और कहा जाता है कि फिल्म की कहानी एक वास्तविक घटना से प्रेरित है। देखने में फिल्म की कहानी किसी भी आम फिल्मी कहानी की तरह ही शुरू होती है…

विवाह एक जोखिम 

जब कभी भी यौनिकता के संदर्भ में जोखिम की बात होती है, तो प्राय: लोग ऐसे लोगों के बारे में ही सोचते हैं जिनके एक से ज़्यादा यौन साथी हो। यौनिकता के ही संदर्भ में, अगर थोड़ा और अधिक खुले मन से विचार किया जाये तो शायद जोखिम को सेक्स के लिए सहमति के अभाव…

क्विअर दुनिया के भीतर की दुनिया – क्विअर मौजूदगी, राजनीति और विविधता 

भारत में क्विअर ऐक्टिविस्म के लिए 2018 का वर्ष ऐतिहासिक रहा। इस दौरान कोलकाता में आयोजित प्राइड वॉक में मैंने देखा कि क्विअर व्यवहारों का उत्सव मनाने और भारतीय दंड विधान की धारा 377 को निरस्त किए जाने की खुशी में विविध क्विअर पहचान, शारीरिक संरचना, अभिव्यक्ति और वैचारिक चेतना रखने वाले क्विअर लोग एक…

विविधता और यौनिकता – कुछ लोगों से बातचीत

इस महीने के इन प्लेनस्पीक के लिए 2 भागों में लिए गए इस इंटरव्यू के लिए शिखा आलेया ने कुछ ऐसे लोगों से बातचीत की जो अपने काम, अपनी कला के माध्यम से लगातार नये मानदंड स्थापित करते रहे हैं और जिन्होंने सामाजिक मान्यताओं और विविधता व यौनिकता के बारे में अपनी समझ और जानकारी…
प्राइड परेड की तस्वीर जिसमे लोगों का एक समूह सतरंगी झंडे को लहरा रहा है। आसपास न्यूज़ चैनल के कुछ लोग कैमरे लेकर खड़े हैं।

मानवीय जीवन का अभिन्न अंग – यौनिकता

अपने यौन रुझानो के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव के डर के बिना, अपनी यौनिकता को उन्मुक्त और स्वतंत्र रूप से प्रकट कर पाने को, यौनिक अधिकारों की श्रेणी में शामिल किया गया है।

सामान्य, पर फिर भी सामान्य नहीं 

जाति और यौनिकता के बीच सामाजिक तौर पर स्वीकृत प्रथाओं के माध्यम से निभाए जाने वाले संबंध हमेशा से ही बहुत जटिल रहे हैं और इन प्रथाओं के चलते जहाँ समाज के प्रभावी वर्ग को इनका लाभ मिलता है, वहीं कमजोर वर्ग इनसे और अधिक वंचित किया जाता है। भारत में, दमन करने की ब्राह्मणवादी…
हैंड कफ की एक तस्वीर

सेक्स टॉय? हाँ क्यों नहीं, पर किसी को पता ना चले

जब मैंने पहली बार भारतीय बाजार में सेक्स टॉय संबंधित जरूरतों को पूरा करने का फैसला किया, तो मुझे एक बात पता थी - मेरे लिए सबसे बड़ी चिंता गोपनीयता बकरार रखने की होगी। मैं लोगों को आनंद पाने के लिए और अपने स्वयं की यौनिकता का पता लगाने के लिए स्वतंत्र महसूस करने के…
x