A digital magazine on sexuality in the Global South

हिन्दी

जेंडर के ढाँचे से जूझता मेरा बचपन

यह लेख मूल रूप में फेमिनिज्म इन इंडिया में प्रकाशित हुआ था। शशांक मैं बचपन से ही बहुत ही नटखट, चुलबुला और थोड़ा अलग बच्चा था| मेरी माँ फिल्मों और गानों की बहुत शौक़ीन थी| माँ के दुपट्टे की साड़ी पहनना, नाचना-गाना, मेरे बचपन के खेल थे| कभी मेरे दादा तो कभी कोई पड़ोस की…

सावित्रीबाई फुले: ज़माने को बदला अपने विचारों से

This post was originally published here. हम अंदाज़ा लगा ही सकते हैं कि जब दलितों का आज भी इतना शोषण होता है तो आज से 150 साल पहले क्या हाल रहा होगा। ऐसे में ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने इनके हकों की बात उठाई। पति-पत्नी की इस जोड़ी ने मांगा और महार जातियों के बीच काम किया। महाराष्ट्र…

यौन संबंध और समाज – अभिव्यक्ति की कल्पना 

मानव जीवन का एक अभिन्न अंग है, यौनिकता। यौनिकता केवल शारीरिक या भौतिक स्तर पर ही सीमित न होकर हमारी सोच, अभिव्यक्ति और व्यवहार नीतियों को भी संबोधित करती है। क्योंकि मनुष्य केवल सामाजिक, राजनितिक, आर्थिक आदि न होकर लैगनिक भी होता है, इसलिए यौन संबंध में रुचि हमें लुभाती है और आकर्षित करती है। हमारे भीतर…

सहयोग कितना हो?

ये लेख किसी रिपोर्ट या रिसर्च पर आधारित नहीं है, लेकिन सच ये है,  कि हम जानते भी तो बहुत ही थोड़ा हैं।  ऐसे में सिर्फ रिसर्च या रिपोर्ट्स पर निर्भर न रह कर मानव अनुभव अत्यधिक को महत्त्वपूर्ण हो जाता है। जैसे मेरा अनुभव ये कहता है, कि वे सभी लोग  जो या तो…

डर के आगे जीत है!

अपनी यौनिकता को समझने की कोशिश,अपने आप में एक नए किस्म का प्रयास है। इस बात का मतलब क्या है? आइये इस नूतनता को समझते हैं। सबसे पहले तो यही, कि हम अपने शरीर, उसकी यौन अभिव्यक्ति, और अलग-अलग तरीकों से आनंद का अनुभव करने की उसकी क्षमता को समझना चाहते हैं। इतना भर भी…

दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश – आदर्शवादी संबंधों की दास्तान 

दीप्ति नवल द्वारा निर्देशित फिल्म, दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश, (वर्ष 2009, नेटफ्लिक्स पर 2019 में रीलीज़) कमोबेश एक यथार्थवादी फिल्म है और कहा जाता है कि फिल्म की कहानी एक वास्तविक घटना से प्रेरित है। देखने में फिल्म की कहानी किसी भी आम फिल्मी कहानी की तरह ही शुरू होती है…

विवाह एक जोखिम 

जब कभी भी यौनिकता के संदर्भ में जोखिम की बात होती है, तो प्राय: लोग ऐसे लोगों के बारे में ही सोचते हैं जिनके एक से ज़्यादा यौन साथी हो। यौनिकता के ही संदर्भ में, अगर थोड़ा और अधिक खुले मन से विचार किया जाये तो शायद जोखिम को सेक्स के लिए सहमति के अभाव…

क्विअर दुनिया के भीतर की दुनिया – क्विअर मौजूदगी, राजनीति और विविधता 

भारत में क्विअर ऐक्टिविस्म के लिए 2018 का वर्ष ऐतिहासिक रहा। इस दौरान कोलकाता में आयोजित प्राइड वॉक में मैंने देखा कि क्विअर व्यवहारों का उत्सव मनाने और भारतीय दंड विधान की धारा 377 को निरस्त किए जाने की खुशी में विविध क्विअर पहचान, शारीरिक संरचना, अभिव्यक्ति और वैचारिक चेतना रखने वाले क्विअर लोग एक…

विविधता और यौनिकता – कुछ लोगों से बातचीत

इस महीने के इन प्लेनस्पीक के लिए 2 भागों में लिए गए इस इंटरव्यू के लिए शिखा आलेया ने कुछ ऐसे लोगों से बातचीत की जो अपने काम, अपनी कला के माध्यम से लगातार नये मानदंड स्थापित करते रहे हैं और जिन्होंने सामाजिक मान्यताओं और विविधता व यौनिकता के बारे में अपनी समझ और जानकारी…
x