A digital magazine on sexuality, based in the Global South: We are working towards cultivating safe, inclusive, and self-affirming spaces in which all individuals can express themselves without fear, judgement or shame

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लेखिका जपलीन पसरीचा एवं उनके स्काई डाइविंग प्रशिक्षक आसमान में स्काई डाइविंग उपकरण से एक साथ बंधे हुए है और स्काई डाइविंग कर रहे हैं

भारत में एकल यात्रा

मैं भली भांति जानती हूँ कि यात्राएं करने से आपका जीवन ‘बदल’ जाने और ‘सबको करनी चाहिए’ के विचारों के बारे में अनेक कथाएँ और कहानियाँ प्रचलन में हैं। मैं यह भी जानती हूँ कि यात्रा कर पाना एक विशेष तरह की सुविधा, एक विशेषाधिकार है और हर कोई जीवन में यात्राएं नहीं कर पाता।
लकड़ी के तल वाले कमरे में काले रंग के परदे लगे है, जिसमे कुछ लड़कियां आपस में रंग बिरंगे रिब्बंस के साथ खेल रही है

आत्मबोध व अभिव्यक्ति – डांस मूवमेंट थेरेपी

डांस मूवमेंट थेरेपी वर्कशाप के उन तीन दिनों में मुझे पता चला कि मेरे मन, मस्तिष्क और शरीर के बीच जैसे कोई सामंजस्य था ही नहीं, और कैसे आमतौर पर पारंपरिक मौखिक कार्यशालाओं में शरीर और मन के बीच के इस संबंध को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
एक लड़की के चेहरे की तस्वीर है। लड़की का रंग गेंहुआ है, नाक में नथनी पहनी है, बिंदी लगायी है, आँखों में काजल, कानो में झुमके और बाल थोड़े बिखरे हुए है और कुछ चेहरे पर आ रहे है |

ख़ामोश प्यार – स्कूली जीवन में यौनिकता पर बातचीत

स्कूल के नियम और अनुशासन मुझ से पूरी तरह से आज्ञाकारी और निर्देशों को मानने वाली छात्रा होने की उम्मीद रखते थे और शायद मेरी यौनिकता और जीवन विकल्पों के मेरे चुनाव पर नियंत्रण रखने को भी अपना अधिकार क्षेत्र समझते थे।
एक बच्ची (जिसकी पीठ और बाल दिख रखे है) पानी के झरने की और देख रही है, झरने क आस-पास हरियाली और पहाड़ है। बच्ची के बाल कंधे तक है और उसने हलके भूरे रंग की कमीज़ पहनी है

अरुवि: घर और ‘मासूमियत’ पर सवालात

समय के साथ-साथ अब मैं जान चुकी हूँ कि उनके इस उलाहने में ‘घर’ का मतलब सिर्फ वो जगह नहीं है जहां मेरे माता-पिता रहते हैं, बल्कि इसका मतलब उन सभी व्यवहारों और मान्यताओं से है जिनकी अक्सर माता-पिता अपने बच्चों से उम्मीद करते हैं।
हिंदी फिल्म 'की एंड का' का एक दृश्य है, एक पुरुष और स्त्री, जो फिल्म में पति-पत्नी का किरदार निभा रहे हैं ।खाने की टेबल पर बैठी पत्नी अखबार पढ़ रही है और पति खाना परोस रहा है।

घर पर रहने के इच्छुक एक पिता की दास्तान

महिला और पुरुष की भूमिकाएँ अलग-अलग जगह, परिस्थितियों, लोगों और उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर बदलती रहती हैं। समय के साथ हो रहे इन बदलावों को देखते हैं लेकिन इन बदलावों से निपटना उन लोगो के लिए आसान नहीं जो इनसे गुज़रते हैं।
अपने कंप्यूटर और फोन के माध्यम से ऑनलाइन स्थानों का अनुभव करने वाले एक व्यक्ति की छवि जिसमे उसके बाएं हाथ में एक स्मार्ट फ़ोन है, सामने मेज पर एक लैपटॉप और एक स्मरण पुस्तक रखी है

यौनिकता व सामाजिक वर्गभेद – ऑनलाइन माध्यमों की बदलाव लाने की क्षमता

डिजिटल माध्यमों तक पहुँच आसान हो जाने से उपेक्षित वर्ग भी अब यौनिकता से जुड़ी सामग्री को देखने, पढ़ने और तैयार कर पाने में सक्षम हुए हैं और इस तरह की जानकारी तक पहुँच पाने में उनके सामने पहले आने वाली कठिनाईयाँ अब दूर होती नज़र आ रही है।
सार्वजनिक स्थान पर एक समूह में बैठी महिलाएँ

मेरी खता नहीं – सार्वजनिक स्थानों पर मेरा भी अधिकार

बदलाव का एक निर्माण खंड कुछ ऐसे उदहारण प्रस्तुत करना है कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों का सकारात्मक व्यवहार कैसा होना चाहिए | उन्हें देख कर पता चलता है कि किस तरह समुदाय के सभी लोग – चाहे मित्र हों या परिचित – कैसे सौहार्दपूर्वक प्रगतिशील जीवन जीते हैं।
उपन्यास 'फैनगर्ल' का पुस्तक आवरण

समीक्षा: रेनबो रौवेल के उपन्यास फैनगर्ल में फैनडम का समस्यात्मक प्रदर्शन

कैथ के किरदार और उसके जीवन को दिखाया जाना वास्तव में उन अनगिनत फैनगर्ल्स के प्रति अन्याय ही कहा जाएगा जो एक फैन के रूप में अपनी पहचान को अपने वास्तविक सामाजिक और यौनिक जीवन व रुझानों पर कभी भी हावी नहीं होने देती।
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