A digital magazine on sexuality in the Global South: We are working towards cultivating safe, inclusive, and self-affirming spaces in which all individuals can express themselves without fear, judgement or shame

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सेक्शुऐलिटी एजुकेटर के मन की बातें   

“दीदी, एक बात पूछूँ आपसे? टॉप सीक्रेट है!” “श्योर, पूछो ना”, कहते हुए मैंने भी सर तो हिला दिया, पर समझ नहीं पा रही थी कि वो आगे क्या पूछेगी।  “मेरे मन में एक लड़के के लिए फीलिंग्स हैं, उसनें मुझसे पूछा तो मैंने हाँ कर दिया। पर अब मुझे लग रहा है मैंने बहुत…

विकलांग महिलाओं के यौन एवं प्रजनन अधिकार – अभी बहुत कुछ करना बाकी है 

भारतीय समाज में मातृत्व को पवित्र माना गया है – यहाँ आपको संतान पैदा करने के अयोग्य महिलाओं को चुड़ैल आदि नामों से पुकारने से जुड़ी अनेक किंवदंतियाँ और कहानियाँ सुनने को मिल जाएंगी। घरेलू हिंसा पर बनाए गए वर्तमान कानून (घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा का कानून) में इस बारे में भी अलग…
सुनहरे बैकग्राउंड, सफेद रंग के अनेक चित्रों और फिल्म क्रेडिट्स के साथ फिल्म एक्सेस का पोस्टर

‘हम इनके किस काम आ सकते हैं?’

इस फिल्म का यह प्रभाव हुआ है कि ये दर्शकों के मन में विचार अंकुरित करने में सफल रही है, एक ऐसे विचार का अंकुर जिसमें आगे चलकर प्रत्येक दर्शक के मस्तिष्क में एक गहन विचार और मंथन की प्रक्रिया बन जाने की क्षमता है।
एक झील के किनारे हरे रंग की घास पर भूरे सफ़ेद रंग की चार बत्तके है जिनमे से तीन बत्तके अपनी चोंच से खुद को सेहला रही है

खुद से मोहब्बत करो

यह सही है कि खुद के व्यक्तित्व को सँवारने के लिए हम जो कुछ भी कोशिशें करते हैं, उन पर बहुत हद तक हमारे सामाजिक वर्ग, जाति, धर्म, यौनिकता के रुझानों और दूसरे कई कारक प्रभाव डालते हैं।

मीडिया और दायित्वपूर्ण चित्रण 

यह बात 2013 की सर्दियों के समय की है। एक शाम मैं और मेरे पिता, घर की बैठक में सोफ़े पर साथ बैठे टेलीविज़न देख रहे थे। टीवी पर उस समय प्राइम टाइम की न्यूज़ डीबेट में समलैंगिकता के विषय पर गर्मागर्म बहस चल रही थी। यह एक ऐसा विषय था जिस पर हम, पिता…

प्यार ऑनलाइन – प्रेम की तलाश इंटरनेट पर 

सदीयों से हम सबकी प्रेम पाने की आशा जस की तस बनी हुई है।  इस सहस्त्राब्दी के आरंभिक वर्षों में नई पीढ़ी के अधिकांश लोगों नें शायद अपनी पहली ईमेल आइडी बनाई होगी या अकाउंट तैयार किया होगा। वर्ष 2004 आते-आते ऑर्कुट की सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट शुरू हो चुकी थी जो अब शायद चलन में…
एक महिला के मुँह को ढक रहे एक लाल रंग के हाथ का भित्ति चित्र। चित्र के साथ पीले रंग में सन्देश है: 'चुप्पी तोड़ों', उसके नीचे बड़े अक्षरों में लिखा है: 'यौन उत्पीड़न एक अपराध है' और उसके ऊपर: 'कानून के ख़िलाफ़'।

लोगों से मिली जानकारी के आंकड़ों के आधार पर अपने शहरों को कैसे सुरक्षित बनाया जा सकता है

उत्पीड़न करने की आदतों को बदलने की कोशिश में नीतियों का बदला जाना ज़रूरी होता है, लेकिन इसके लिए यह भी ज़रूरी है कि लोग उत्पीड़न के विरोध में अपनी आवाज़ उठाएँ।
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