A digital magazine on sexuality in the Global South: We are working towards cultivating safe, inclusive, and self-affirming spaces in which all individuals can express themselves without fear, judgement or shame

हिन्दी

मेरी उलझी प्रेम कहानी 

अपने बालों से मेरा संबंध हमेशा से ही उलझन भरा रहा है। मुझे याद है बचपन में मेरे बाल बहुत ज़्यादा घने और बिखरे हुए भी थे और मुझे और मेरी माँ को रोज़ इन्हे सँवारने में मशक्कत करनी पड़ती थी। मुझे जानने और मिलने वाली ज़्यादातर लड़कियों के बाल सीधे, नरम और रेशमी हुआ…

आखिर लोग क्या कहेंगे!

नेटफ्लिक्स ब्राउज़ करते हुए अनायास ही मेरी निगाह में एक फिल्म आई, वॉट विल पीपल से ? मैं एक ऐसे सामाजिक माहौल में पली-बड़ी हूँ जहाँ हर किसी को दूसरों की, कि लोग क्या कहेंगे की, बहुत परवाह रहती है (अपना क्या विचार है, इसकी परवाह उतनी नहीं होती) और शायद इसीलिए फिल्म के शीर्षक…

मैंने भारत में 1 वर्ष बिताया और असहज सी रही! 

Annie McCarthy मेरे लिए हैरानी की बात यह है कि मुझे कुर्तियाँ पहनने में उतनी घबराहट कभी नहीं हुई जितनी कि मुझे तब होने लगती है जब मुझे अपने कपड़ों की अलमारी में टंगे हुए किन्ही खास मौकों (आम तौर पर मेरी माँ इसका फैसला लेती हैं) पर पहने जाने वाले महिला परिधानों को पहनने…

सेक्शुऐलिटी एजुकेटर के मन की बातें   

“दीदी, एक बात पूछूँ आपसे? टॉप सीक्रेट है!” “श्योर, पूछो ना”, कहते हुए मैंने भी सर तो हिला दिया, पर समझ नहीं पा रही थी कि वो आगे क्या पूछेगी।  “मेरे मन में एक लड़के के लिए फीलिंग्स हैं, उसनें मुझसे पूछा तो मैंने हाँ कर दिया। पर अब मुझे लग रहा है मैंने बहुत…

शायद उम्र सिर्फ एक क्रमसंख्या ही नहीं होती? अपनी यौनिकता और अनेक वर्षों के अपने यौन रुझानों का बोध   

2006 में जब पहले-पहल मैं दिल्ली आई, उस समय मेरी उम्र 22 वर्ष की थी और मुझे यौनिक व्यंग्य या कटाक्षों के बारे में बिलकुल भी जानकारी नहीं थी। उन दिनों एफ़एम रेडियो पर ‘Fropper’ नाम की एक मशहूर डेटिंग/’दोस्ती’ करने की साइट का विज्ञापन चला करता था, और मैंने एक बार कॉल सेंटर की…

विकलांग महिलाओं के यौन एवं प्रजनन अधिकार – अभी बहुत कुछ करना बाकी है 

भारतीय समाज में मातृत्व को पवित्र माना गया है – यहाँ आपको संतान पैदा करने के अयोग्य महिलाओं को चुड़ैल आदि नामों से पुकारने से जुड़ी अनेक किंवदंतियाँ और कहानियाँ सुनने को मिल जाएंगी। घरेलू हिंसा पर बनाए गए वर्तमान कानून (घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा का कानून) में इस बारे में भी अलग…
मुंबई में रात में एक रेलवे स्टेशन के सामने अलग-अलग रंग के खंभों पर लटके हुए कपड़ों की तस्वीर

वाशी की लास्ट लोकल

न जाने कितने अनुभवों के बाद ही मैंने यह समझा था कि देर रात से घर लौटने के लिए आख़री लोकल ट्रेन में सफर करना भी एक विकल्प हो सकता है। अपने घर से दूर किसी दूसरे शहर में रहते हुए बड़े होने का एक लाभ यह होता है कि आप दुनिया को एक नए नज़रिये से देख पाते हैं।
हाथ से बने चित्र में काली और नारंगी पृष्ठभूमि पर रंगबिरंगी औरत अपने घुटनो को मोड़ कर उन्हें पकड़ कर बैठी है

प्रेम विकलांग नहीं होता 

प्रेम के लिए कोई ‘नियम पुस्तक’ तैयार नहीं हो पालगाने ई है और इन भावों को जानने और समझने के लिए बहुत सोच विचार और दिमागी ज़ोर की ज़रूरत होती है।
x