A digital magazine on sexuality in the Global South: We are working towards cultivating safe, inclusive, and self-affirming spaces in which all individuals can express themselves without fear, judgement or shame

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मेट्रो के एक डब्बे के अंदर की तस्वीर। मेट्रो के अंदर लाल रंग की सारी सीट खाली हैं।

उन्मुक्त स्वछंद व्यवहार और लोगों की प्रतिक्रिया – एक मेट्रो यात्री की नज़र से 

इस घटना नें मुझे हिलाकर रख दिया था। मुझे महसूस हुआ कि हमारे समाज में जहां सामान्य से हटकर किसी भी तरह के व्यवहार को मान्य नहीं समझा जाता, वहाँ लोगों को सिर्फ अपने जेंडर और यौनिकता की अभिव्यक्ति करने की भी कितने बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। समाज के इस असहनशीलता से मेरे मन में डर का जो भाव पैदा हुआ, वह मेरे लिए कोई नया नहीं था।
एक टूटे हुए शीशे की तस्वीर। इस तस्वीर में शीशे के धारें दिखाई पड़ रही हैं।

कभी दोस्त रहे एक व्यक्ति के नाम खत 

अब मैं बार–बार पीछे मुड़कर देखने और अंजान आदमियों के भय से डरी रहने से भी थक चुकी हूँ। मेरे मन में हमेशा यह डर बना रहता है कि मेरी शारीरिक सीमायों का कोई उल्लंघन न कर दे और साथ ही मैं अब लोगों को अपने से दूर रखते रहने की कोशिश करते हुए भी थक चुकी हूँ।
एक लड़की की तस्वीर जो समुद्र के किनारे ढलते सूरज को देख रही है

महिला जीवन, बढ़ती उम्र और यौन स्वतन्त्रता 

व्यक्तिगत रूप से मुझे, एक युवा अविवाहित लड़की से अब प्रगतिशील और सकारात्मक प्रभाव और संतोषजनक सम्बन्ध रख चुकी उम्रदराज़ विवाहित महिला बनने के इस सफर से अपने निजी जीवन में अपनी प्राथमिकताएँ निर्धारित करने में बहुत मदद मिली है।

उम्मीद न छोड़ें? उम्र के बढ़ने और उम्र संबंधित पक्षपात की ओर भारतीय क्वीयर आंदोलनों का रवैया 

पवन ढल    सैद्धांतिक रूप से यौनिकता को अक्सर पूरी तरह से परिवर्तनशील बता कर परिभाषित किया जाता रहा है। इसका अर्थ यह हुआ कि अलग-अलग समय में एक ही व्यक्ति को अपनी यौनिकता से अलग अनुभव हो सकते हैं, या फिर एक सामाजिक समूह के लोग अपनी यौनिकता को जीवन के विभिन्न चरणों में…
एक लड़की की तस्वीर, जिसमे वह अपने हाथ को पीछे करके और अपना सर ऊपर करके खड़ी है। पीछे समुद्र और ढलता हुआ सूरज दिखाई पड़ रहा है।

यौनिकता और एकल महिला 

मेरी सफलता के बारे में और उस पर मेरे अविवाहित होने की बात सुनकर अधिकांश पुरुष मेरे प्रति कुछ अधिक जिज्ञासु हो जाते है जबकि महिलाएं मेरे अविवाहित होने के बारे में सुनकर कुछ और ज़्यादा सवाल करने लगते हैं।

जेंडर के ढाँचे से जूझता मेरा बचपन

यह लेख मूल रूप में फेमिनिज्म इन इंडिया में प्रकाशित हुआ था। शशांक मैं बचपन से ही बहुत ही नटखट, चुलबुला और थोड़ा अलग बच्चा था| मेरी माँ फिल्मों और गानों की बहुत शौक़ीन थी| माँ के दुपट्टे की साड़ी पहनना, नाचना-गाना, मेरे बचपन के खेल थे| कभी मेरे दादा तो कभी कोई पड़ोस की…

सावित्रीबाई फुले: ज़माने को बदला अपने विचारों से

This post was originally published here. हम अंदाज़ा लगा ही सकते हैं कि जब दलितों का आज भी इतना शोषण होता है तो आज से 150 साल पहले क्या हाल रहा होगा। ऐसे में ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने इनके हकों की बात उठाई। पति-पत्नी की इस जोड़ी ने मांगा और महार जातियों के बीच काम किया। महाराष्ट्र…

यौन संबंध और समाज – अभिव्यक्ति की कल्पना 

मानव जीवन का एक अभिन्न अंग है, यौनिकता। यौनिकता केवल शारीरिक या भौतिक स्तर पर ही सीमित न होकर हमारी सोच, अभिव्यक्ति और व्यवहार नीतियों को भी संबोधित करती है। क्योंकि मनुष्य केवल सामाजिक, राजनितिक, आर्थिक आदि न होकर लैगनिक भी होता है, इसलिए यौन संबंध में रुचि हमें लुभाती है और आकर्षित करती है। हमारे भीतर…

सहयोग कितना हो?

ये लेख किसी रिपोर्ट या रिसर्च पर आधारित नहीं है, लेकिन सच ये है,  कि हम जानते भी तो बहुत ही थोड़ा हैं।  ऐसे में सिर्फ रिसर्च या रिपोर्ट्स पर निर्भर न रह कर मानव अनुभव अत्यधिक को महत्त्वपूर्ण हो जाता है। जैसे मेरा अनुभव ये कहता है, कि वे सभी लोग  जो या तो…

डर के आगे जीत है!

अपनी यौनिकता को समझने की कोशिश,अपने आप में एक नए किस्म का प्रयास है। इस बात का मतलब क्या है? आइये इस नूतनता को समझते हैं। सबसे पहले तो यही, कि हम अपने शरीर, उसकी यौन अभिव्यक्ति, और अलग-अलग तरीकों से आनंद का अनुभव करने की उसकी क्षमता को समझना चाहते हैं। इतना भर भी…

दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश – आदर्शवादी संबंधों की दास्तान 

दीप्ति नवल द्वारा निर्देशित फिल्म, दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश, (वर्ष 2009, नेटफ्लिक्स पर 2019 में रीलीज़) कमोबेश एक यथार्थवादी फिल्म है और कहा जाता है कि फिल्म की कहानी एक वास्तविक घटना से प्रेरित है। देखने में फिल्म की कहानी किसी भी आम फिल्मी कहानी की तरह ही शुरू होती है…

विवाह एक जोखिम 

जब कभी भी यौनिकता के संदर्भ में जोखिम की बात होती है, तो प्राय: लोग ऐसे लोगों के बारे में ही सोचते हैं जिनके एक से ज़्यादा यौन साथी हो। यौनिकता के ही संदर्भ में, अगर थोड़ा और अधिक खुले मन से विचार किया जाये तो शायद जोखिम को सेक्स के लिए सहमति के अभाव…
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