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एक समय ऐसा था जब मैं भी लड़कियों के लिए बनाई जाने वाली हर चीज़ से सिर्फ इसलिए दूर भागती थी क्योंकि मुझे लगता था कि नारीवादी दिखने के लिए एक खास तरीके से दिखना और व्यवहार करना आवश्यक है।
अपने बालों से मेरा संबंध हमेशा से ही उलझन भरा रहा है। मुझे याद है बचपन में मेरे बाल बहुत…
नेटफ्लिक्स ब्राउज़ करते हुए अनायास ही मेरी निगाह में एक फिल्म आई, वॉट विल पीपल से ? मैं एक ऐसे…
Annie McCarthy मेरे लिए हैरानी की बात यह है कि मुझे कुर्तियाँ पहनने में उतनी घबराहट कभी नहीं हुई जितनी…
“दीदी, एक बात पूछूँ आपसे? टॉप सीक्रेट है!” “श्योर, पूछो ना”, कहते हुए मैंने भी सर तो हिला दिया, पर…
2006 में जब पहले-पहल मैं दिल्ली आई, उस समय मेरी उम्र 22 वर्ष की थी और मुझे यौनिक व्यंग्य या…
भारतीय समाज में मातृत्व को पवित्र माना गया है – यहाँ आपको संतान पैदा करने के अयोग्य महिलाओं को चुड़ैल…
न जाने कितने अनुभवों के बाद ही मैंने यह समझा था कि देर रात से घर लौटने के लिए आख़री लोकल ट्रेन में सफर करना भी एक विकल्प हो सकता है। अपने घर से दूर किसी दूसरे शहर में रहते हुए बड़े होने का एक लाभ यह होता है कि आप दुनिया को एक नए नज़रिये से देख पाते हैं।
प्रेम के लिए कोई ‘नियम पुस्तक’ तैयार नहीं हो पालगाने ई है और इन भावों को जानने और समझने के लिए बहुत सोच विचार और दिमागी ज़ोर की ज़रूरत होती है।
इस फिल्म का यह प्रभाव हुआ है कि ये दर्शकों के मन में विचार अंकुरित करने में सफल रही है, एक ऐसे विचार का अंकुर जिसमें आगे चलकर प्रत्येक दर्शक के मस्तिष्क में एक गहन विचार और मंथन की प्रक्रिया बन जाने की क्षमता है।
यह सही है कि खुद के व्यक्तित्व को सँवारने के लिए हम जो कुछ भी कोशिशें करते हैं, उन पर बहुत हद तक हमारे सामाजिक वर्ग, जाति, धर्म, यौनिकता के रुझानों और दूसरे कई कारक प्रभाव डालते हैं।
यह बात 2013 की सर्दियों के समय की है। एक शाम मैं और मेरे पिता, घर की बैठक में सोफ़े…
सदीयों से हम सबकी प्रेम पाने की आशा जस की तस बनी हुई है। इस सहस्त्राब्दी के आरंभिक वर्षों में…
उत्पीड़न करने की आदतों को बदलने की कोशिश में नीतियों का बदला जाना ज़रूरी होता है, लेकिन इसके लिए यह भी ज़रूरी है कि लोग उत्पीड़न के विरोध में अपनी आवाज़ उठाएँ।
इस घटना नें मुझे हिलाकर रख दिया था। मुझे महसूस हुआ कि हमारे समाज में जहां सामान्य से हटकर किसी भी तरह के व्यवहार को मान्य नहीं समझा जाता, वहाँ लोगों को सिर्फ अपने जेंडर और यौनिकता की अभिव्यक्ति करने की भी कितने बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। समाज के इस असहनशीलता से मेरे मन में डर का जो भाव पैदा हुआ, वह मेरे लिए कोई नया नहीं था।