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संपादक की ओर से – जब शरीर और यौनिकता के बीच के रिश्ते की बात की जाती है तो ये…
सेक्स या भावनात्मक जुड़ाव के लिए दोनों तरफ़ से जुड़ाव होना ज़रूरी है। विकलांगता के साथ जी रहे व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से थोड़ा ज़्यादा देना होगा जिससे कि रिश्ता चल सके।
Tales delicately yet powerfully draws out the conflict between sex workers and feminism in India,at a time when a lot of feminists thought of prostitution through a SWERF lens[1].
जब मैंने पहली बार भारतीय बाजार में सेक्स टॉय संबंधित जरूरतों को पूरा करने का फैसला किया, तो मुझे एक…
सेक्शूऐलिटी और जलवायु परिवर्तन के कारण जलवायु आपदाओं के बीच का रिश्ता भले ही सीधा न दिखाई दे, लेकिन यह बेहद गहरा और महत्वपूर्ण है।
“दीदी, एक बात पूछूँ आपसे? टॉप सीक्रेट है!” “श्योर, पूछो ना”, कहते हुए मैंने भी सर तो हिला दिया, पर…
यडिजिटल हिंसा सिर्फ़ टेक्नोलॉजी की समस्या नहीं है। यह समाज में पहले से मौजूद असमानताओं का ही विस्तार है।
सुरक्षित सेक्स पर लिखी और बताई जाने वाली बातें अक्सर मेडिकल या चिकित्सीय शब्दावली में लिखी गयी होती हैं –…
गाने अक्सर फिल्मों से अधिक लोकप्रिय होते है और अपने अलग ही मतलब का निर्माण करते हैं। इनका मतलब उनता ही विविध है जितना इनको सुनने वाले लोग। मैं यह बिल्कुल नहीं मानता कि हम जो फिल्म और चित्र देखते है उसका हमारे जीवन पर सीधा असर पड़ता है। हिंसक या अन्यथा मूर्खतापूर्ण कार्यों के लिए दोषी वह ही हैं जो यह कार्य करते हैं और वे जो उन्हें बेहतर शिक्षा दे सकते थे पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। शिक्षा और बातचीत से हम युवाओं को सही समझ और बेहतर निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाते हैं।
This post was originally published here. हम अंदाज़ा लगा ही सकते हैं कि जब दलितों का आज भी इतना शोषण…
शहरी स्थानों को पुनः प्राप्त करने के लिए, सार्वजनिक स्थानों पर प्यार और रोमांस की पुलिसिंग या निगरानी के कई पहलुओं को देखना महत्वपूर्ण है
जाति और यौनिकता के बीच सामाजिक तौर पर स्वीकृत प्रथाओं के माध्यम से निभाए जाने वाले संबंध हमेशा से ही…
‘आप मटरगश्ती (लॉयटर) क्यों करना चाहेंगे?’ नारीवादी शोधकर्ता, अभिभावक, शिक्षक और सक्रियतावादी डॉ॰ शिल्पा फडके से पूछने के लिए एक बढ़िया सवाल है।
“इन युवा महिलाओं नें तो हमारे विचारों को और आगे तक पहुंचाया है, और महिलाओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच पाने के नए आंदोलन खड़े किए हैं। इसमें उनका देर रात तक बाहर रहना, महिला हॉस्टल में लगाई जा रही समय की पाबंदियों को ठुकराना, और महिला शौचालयों और सार्वजनिक यातायात तक अधिक सुलभता पाने की मांग करना शामिल है।”
ऐसी जगहों की बहुत कमी है जहां विकलांगता के साथ जी रहे लोग अपने यौनिक अनुभवों या यौनिक जिज्ञासा के बारे में खुलकर बात कर सकें। खास तौर पर विकलांगता के साथ जी रहे युवाओं पर हर वक़्त निगरानी रहती है जिसका मतलब है कि वे यौन अनुभवों से वंचित रह जाते हैं और अपनी यौनिकता को समझ नहीं पाते।