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दीप्ति नवल द्वारा निर्देशित फिल्म, दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश, (वर्ष 2009, नेटफ्लिक्स पर 2019 में रीलीज़)…
दो कविताएं – हवेली आधुनिकता के आवरण में क्षयग्रस्त पारंपरिक पुरुषत्व को दर्शाती है, जबकि चारपाई कठोर और लचीली अभिव्यक्तियों के बीच विरोधाभास प्रस्तुत करती है, जहां जो जिस चारपाई पर बैठते हैं, उसके गुणों को अपनाते हैं, जो भिन्न-भिन्न पुरुषवादी पहचानों का प्रतीक है।
पहले जिन स्त्रीसुलभ व्यवहारों के कारण मुझमें वो मेएलीपन दिखाई देता था, अब वो मेरे जीवन का हिस्सा बन चुका है। वह अब उन सब कपड़ों में जो मैं पहनती हूँ, जिस अंदाज़ में मैं चलती, सोचती और बात करती हूँ या लोक चर्चाओं में भाग लेती हूँ, परिलक्षित होता है।
पहले जिन स्त्रीसुलभ व्यवहारों के कारण मुझमें वो मेएलीपन दिखाई देता था, अब वो मेरे जीवन का हिस्सा बन चुका है। वह अब उन सब कपड़ों में जो मैं पहनती हूँ, जिस अंदाज़ में मैं चलती, सोचती और बात करती हूँ या लोक चर्चाओं में भाग लेती हूँ, परिलक्षित होता है।
अधिकतर लड़कियों के लिए गोल प्रोग्राम वह पहला साधन बनता है जहाँ वे अपने जीवन, घरों में और आसपास हो रहे अपने जेंडर की भूमिका, भविष्य के बारे में सवाल, स्वाधीनता और उसकी चुनौती को समझ सकें।
इन प्लेनस्पीक के लिए ये लेख लिखना मेरे लिए एक तीर से तीन निशाने जैसा रहा, पहला, संस्करण के लिए समीक्षा…
हमें नहीं बनना महान
हमें इंसान ही रहने दो।
बलबीर कृषन भारत के उन समकालीन कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने सांप्रदायिक हिंसा, आपदाओं, जेन्डर आधारित हिंसा, यौनिकता और…
जलवायु न्याय की बात करना इस बारे में बात करना है कि कौन सुरक्षित महसूस करेंगे, कौन चुनने का अधिकार पाएंगे, कौन चाहने का अधिकार पाएंगे
निरंतर से ऐनी और नीलिमा द्वारा यह बात लगभग दो हफ्ते पहले गाँव पठा, ललितपुर जिला, महरौनी ब्लॉक के सूचना केंद्र की…
जबकि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारत में क्वीयर लोगों को जुड़ने, ख़ुद को अभिव्यक्त करने और गैर-अपराधीकरण के बाद समुदाय ख़ोजने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं, संबद्धता के विचार अभी भी जाति, वर्ग, सौंदर्यशास्त्र आदि में उलझे हुए हैं जो बहिष्कार को कायम रखते हैं।
अपनी यौनिकता को समझने की कोशिश,अपने आप में एक नए किस्म का प्रयास है। इस बात का मतलब क्या है?…
जीवन में उम्र बढ़ने के साथ, खासकर किशोरावस्था पार होने पर, यौनिकता पर चर्चा में हमेशा ‘सुरक्षित रहने’ पर ही बात होती है – और इसी नज़रिये से यह माना जाता है कि हमारी सुरक्षा इसी बात पर निर्भर करती है कि हम एक विषमलैंगिक-पितृसत्तात्म्क व्यवस्था के अनुरूप किसतरह से व्यवहार करते हैं।
उठा तो फिर से आँखें लाल थीं। फिर से भगवान से प्रार्थना करते हुए उठा कि कल तक सब कुछ…
जॉनसन थॉमस [संपादक की ओर से: स्वयं की देखभाल करने का सीधा मतलब है अपनी मर्ज़ी से कोई भी ऐसा…