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जबकि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारत में क्वीयर लोगों को जुड़ने, ख़ुद को अभिव्यक्त करने और गैर-अपराधीकरण के बाद समुदाय ख़ोजने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं, संबद्धता के विचार अभी भी जाति, वर्ग, सौंदर्यशास्त्र आदि में उलझे हुए हैं जो बहिष्कार को कायम रखते हैं।
हमें एक ऐसी डिजिटल दुनिया चाहिए जहाँ जानकारी डर नहीं बल्कि समझ पैदा करे
अपनी यौनिकता को समझने की कोशिश,अपने आप में एक नए किस्म का प्रयास है। इस बात का मतलब क्या है?…
जीवन में उम्र बढ़ने के साथ, खासकर किशोरावस्था पार होने पर, यौनिकता पर चर्चा में हमेशा ‘सुरक्षित रहने’ पर ही बात होती है – और इसी नज़रिये से यह माना जाता है कि हमारी सुरक्षा इसी बात पर निर्भर करती है कि हम एक विषमलैंगिक-पितृसत्तात्म्क व्यवस्था के अनुरूप किसतरह से व्यवहार करते हैं।
उठा तो फिर से आँखें लाल थीं। फिर से भगवान से प्रार्थना करते हुए उठा कि कल तक सब कुछ…
जॉनसन थॉमस [संपादक की ओर से: स्वयं की देखभाल करने का सीधा मतलब है अपनी मर्ज़ी से कोई भी ऐसा…
यह लेख मूल रूप में फेमिनिज्म इन इंडिया में प्रकाशित हुआ था। शशांक मैं बचपन से ही बहुत ही नटखट,…
मालिनी छिब के लेख सेक्सलेस इन द सिटी (जिसमें मेरी कोई गलती भी नहीं) को पढ़ना एक रुचिकर अनुभव रहा…
मैं उन विभिन्न जिमों के बाथरूम में बिताए अपने अनुभवों को याद कर सकता हूँ। पुरुषों का बाथरूम एक अद्भुत जगह होता है यह देखने के लिए कि कैसे यौनिकता अपने अलग-अलग पहलुओं में ज़ाहिर होती है।
जहाँ महिलाओं का अंतरिक्ष में पहला कदम महिला विकास की ओर एक बड़ा कदम है वहीं समाज में हो रहे…
जहाँ महिलाओं का अंतरिक्ष में पहला कदम महिला विकास की ओर एक बड़ा कदम है वहीं समाज में हो रहे…
संपादक की ओर से: जैसा कि इस अंक के सम्पादकीय में बिलकुल सही कहा गया है, जन आन्दोलनों की उपस्थिति…
जलवायु परिवर्तन का नाम सुनते ही हमारे मन में केवल पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का विचार आता है, लेकिन इसका ग़हरा संबंध हमारी मानसिक सेहत और यौनिकता से भी है
वर्किंग वुमन या ‘कामकाजी महिला’ शब्द सुनने पर, सबसे पहले हमारे मन में क्या विचार आता है? यही न कि…
हमने सालों में जो हुनर, रिश्तों के जाल और टिके रहने की ताक़त बनाई है, वो सिर्फ़ हाशिए की कहानियाँ नहीं हैं – वो ऐसे औज़ार हैं जिनसे पूरी व्यवस्था सीख सकती है।