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ट्राँसमैन और मानसिक स्वास्थ्य – एक विचार

उठा तो फिर से आँखें लाल थीं। फिर से भगवान से प्रार्थना करते हुए उठा कि कल तक सब कुछ ठीक हो जाएगा! लेकिन अंदर से मुझे पता है कि कल का दिन भी आज की तरह या किसी और दिन की तरह ही होगा।

शीशे के सामने खड़े होना, मेरे लिए, हर दिन का संघर्ष है, क्योंकि जिस प्रतिबिम्ब को मैं शीशे में देखता हूँ, उसे पहचानता नहीं। हर दिन मैं घर से बाहर निकलने या लोगों का सामना करने के लिए संघर्ष करता हूँ। उनकी जिज्ञासा भरी नज़रें मुझे बहुत परेशान करती हैं।

जब घर में कोई नहीं होता था, तो मैं अपनी माँ का दुपट्टा निकालता और उसे अपनी छाती पर बाँधता ताकि वह सपाट दिखे। बेशक, यह उतना आसान नहीं था जितना लगता है क्योंकि उस वक़्त मैं मुश्किल से साँस ले पाता था। मैं अपनी बहन का काजल चुराता और अपने चेहरे पर मूँछें बनाता, और जब मेरे बाल लंबे होते थे, तो मैं अपने बालों को छिपाने के लिए टोपी पहन लेता था। यह अच्छा लगता था।

लेकिन क्या मैं इस तरह बाहर जा सकता था? बिल्कुल नहीं! लोग क्या सोचेंगे? “यह सनकी कौन है? तुम लड़का हो या लड़की?  इतने अजीब क्यों हो, सर्कस में शामिल हो गए हो क्या?” मैं इन सवालों का सामना करने से डरता था इसलिए मैं लड़के की तरह तैयार होने की अपनी इच्छा को बस दबा देता।

आप सोच रहे होंगे कि मैं कौन हूँ। मैं एक ट्राँस पुरुष या ट्राँसमैन (वे जिन्हें समाज द्वारा, जन्म के समय या जननांगों के आधार पर, महिला का जेंडर दिया गया पर वे स्वयं की पहचान पुरुष के रूप में करते हैं) हूँ। मुझे जन्म के समय महिला जेंडर दिया गया था, लेकिन मैंने कभी महिला की तरह महसूस नहीं किया, कभी नहीं! मैंने हमेशा एक पुरुष की तरह महसूस किया है, और इसलिए मेरी जेंडर पहचान एक पुरुष की है।

मुझे वो है जिसे मनोचिकित्सकों द्वारा जेंडर डिस्फोरिया कहा जाता है, हालाँकि कई ट्राँस लोग इस तरह के मेडिकल लेबल लगाए जाने के खिलाफ़ लड़ रहे हैं। यह एक ऐसी अवस्था है जहाँ व्यक्ति अपने उस शरीर से जुड़ा महसूस नहीं कर पाता जिस शरीर में वह पैदा होता है। विभिन्न ट्राँसपुरुषों के लिए डिस्फोरिया की प्रबलता अलग-अलग होती है। कुछ ट्राँसपुरुष अपने शरीर के साथ सहज हैं, और कुछ अपने शरीर में कुछ बदलाव करना चाहते हैं। यह किसी को कम या ज़्यादा ट्राँसपुरुष नहीं बनाता है।

मेरे जैसे ट्राँसपुरुष के लिए, डिस्फोरिया की प्रबलता बहुत अधिक है। यह एक गंभीर तकलीफ़ है, और मैं हर दिन अपने अस्तित्व और अपने शरीर पर सवाल करता हूँ। मेरे लिए, यह मेरी छाती के स्थान पर, मेरी त्वचा पर, चेहरे पर बालों की कमी पर, और मेरे पैंट में जो है, उस पर केंद्रित है। मुझे हर दिन इन प्रबल भावनाओं से लड़ना पड़ता है, और यह प्रबलता इस सच्चाई से और अधिक बढ़ जाती है कि समाज ट्राँसपुरुषों के मुद्दों से अनजान है।

बड़े होते समय, मुझे लगता था कि यह प्रबलता एक दिन कम हो जाएगी; लेकिन यह कभी नहीं ख़त्म हुई। असल में, यह हर दिन बढ़ती गई। बचपन में इसने मुझे बहुत अकेला बना दिया था। मुझे लगता था जैसे पूरे ब्रह्मांड में मैं अकेला ही था जिसे इस तरह महसूस होता था। स्कूल में, मेरी भावनाओं और संघर्षों के बारे में बात करने के लिए कोई नहीं था। मैंने स्कूल में पैंट और शर्ट पहनने के लिए अधिकारियों के साथ कड़ी लड़ाई की। मेरे टीचर इसके बारे में बिल्कुल भी नहीं समझ रहे थे। और मेरे कोई दोस्त नहीं थे। मैंने अपने जेंडर के बारे में अपने परिवार से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया।

हालाँकि, कुछ सालों बाद मैंने खुद पर ‘नारी सुलभ’/जनाना बनने के लिए दबाव डालना बंद कर दिया। मैंने खुद को जैसा मैं था वैसा स्वीकार करना शुरू कर दिया। मैंने औरतों वाले कपड़े पहनना बंद कर दिया, और अपने बालों को काट दिया। मुझे जेंडर परिवर्तन सर्जरी के लिए पैसा चाहिए था और इसलिए मैंने कॉर्पोरेट कार्यालय में काम करने का फैसला किया। कुछ चीजें कभी नहीं बदलती हैं। धमकाना जारी रहा, घूरना जारी रहा, और मैंने वहाँ लेस्बियनटैग या लेबल के साथ काम किया।

ट्राँसपुरुष के साथ भी यौन उत्पीड़न होता हैं। एक बार, जब मैं दिल्ली में लाल किले गया था, तो सुरक्षा जाँच पर महिला पुलिसकर्मी ने मेरे पैंट में अपने हाथ डाले ताकि यह पता चल सके कि मैं लड़का था या लड़की। मैं अवाक् रह गया था लेकिन मुझे इसके बारे में किसी से बात करने से भी डर लगता था। हिंसा की ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए मैं कहाँ जाऊँ? मैं इन मुद्दों के बारे में किससे बात करूँ? और यह ऐसे कई उदाहरणों में से एक है जो मेरे और अन्य ट्राँसपुरुषों के साथ हुए हैं।

ट्राँसमहिलाओं के कई समुदायों और समर्थन समूहों के विपरीत, ट्राँसपुरुषों के शायद ही कोई समुदाय हैं। किसी नए व्यक्ति के लिए अन्य ट्राँस लोगों से मिलना मुश्किल है। और जब प्यार की बात आती है, तो उन ट्राँसपुरुषों के लिए साथी को ढूँढना और भी ज़्यादा मुश्किल है जो महिलाओं की ओर आकर्षित होते हैं। विषमलैंगिक महिलाएँ सिस पुरुष (पुरुष जो जन्म के समय उन्हें दिए गए पुरुष जेंडर के साथ सहज हैं) चाहती हैं, और अधिकाँश समलैंगिक महिलाएँ महिलाओंकी ओर आकर्षित होती हैं। निश्चित रूप से कुछ ट्राँसपुरुष हैं जो या तो पुरुषों या अन्य ट्राँस लोगों की ओर आकर्षित होते हैं।

ट्राँस व्यक्ति के जीवन में शारीरिक बदलाव करवाना एक और बड़ी चुनौती है। यह ट्राँसजेंडर व्यक्ति के अनुभव का एक बड़ा हिस्सा है। हम में से कई लोगों के लिए इस बदलाव के लिए पैसा जुटाना एक प्रमुख मुद्दा है। इसके साथ कई डर जुड़े हुए हैं जैसे परिवार, दोस्तों, सहयोगियों, आदि द्वारा कैसे स्वीकार किया जाएगा। क्या वे मुझे एक असलीपुरुष की तरह देख पाएंगे?

और मैं यहाँ अपने अनुभव क्यों साझा कर रहा हूँ? क्योंकि ये चीजें मेरे जैसे लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहराई से प्रभाव डालती हैं। हम प्रबल जेंडर डिस्फोरिया से गुज़रते हैं, और डिस्फोरिया के साथ आता है – तनाव, चिंता, घबराहट और अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियाँ।

इन सभी मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के अलावा, भारत में,  डॉक्टर जेंडर के आज्ञालंघन’ को अभी भी एक विकार मानकर इसका इलाज करते हैं। मानसिक विकारों का नैदानिक ​​और सांख्यिकीय मैनुअल 4 (डीएसएम -4)  जेंडर पहचान विकार (जेंडर आइडेंटिटी डिस्आर्डर – जी.आई.डी.) शब्द का उपयोग करता है। डी.एस.एम.-5 में, इसे जेंडर डिस्फोरिया के रूप में पुनः वर्गीकृत किया गया है। (डिस्फोरिया शब्द के विपरीत डिसऑर्डर शब्द बीमारी या किसी गड़बड़ी की ओर संकेत करता है।) कुछ ट्राँसजेंडर व्यक्तियों के मुताबिक, जी.आई.डी. जेंडर के द्विआधारी (बाइनरी) मॉडल को मज़बूत, और जेंडर को रोग करार देता है। इसे जेंडर डिस्फोरिया के रूप में पुन: वर्गीकृत किया जाना, इन मुद्दों में से कुछ को हल करने में मदद कर सकता है क्योंकि यह ट्राँस लोगों द्वारा अनुभव किए गए असंतोष को संदर्भित करता है। हालाँकि, मैं अभी भी जेंडर पहचान विकार प्रमाण पत्र लिए फिर रहा हूँ, भले ही मैं नहीं मानता कि ट्राँसपुरुषों को विकार है; यह सिर्फ़ इतना है कि हम अलग हैं और जेंडर मानदंडों का आज्ञालंघन करते हैं।

अब समय आ गया है कि जब हम ट्राँसपुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करें। कुछ ट्राँसपुरुष एक असमानुभूतिपूर्ण समाज के कारण मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के लिए चिकित्सा ले रहे हैं। कुछ ट्राँसपुरुषों ने इसके कारण आत्महत्या भी की है।

आखिर और कितनी ज़िंदगियाँ दाँव पर लगनी हैं?

सुनीता भदौरिया द्वारा अनुवादित

To read this article in English, please click here http://www.tarshi.net/inplainspeak/on-mental-health-and-being-a-transman/

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Jamal is a transman who works in a corporate office in Gurugram. He is a member of Nazariya's group called Soch and is passionate about transmen's issues. In his free time, he loves to read spiritual books and watch sci-fi movies. He also loves playing with his and his partner's cats.

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