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एक आदमी होने का मतलब है काफी कुछ भी अपने काबू में रखना। अपना व्यवसाय, अपनी भावनाएं, अपना घरबार, और खासकर अपनी यौन ज़िंदगी।
कम उम्र में विवाह और बाल विवाह एक बेहद विखंडित और असमान समाज का लक्षण है। जब भी यह पूछा गया कि लोग अपने बच्चों की कम उम्र में शादी क्यों करते हैं तो “दहेज़”, “गरीबी” और “यौन हिंसा का डर” आदि कारण सबसे ज़्यादा सुनाई दिए।
जुलाई १, २०१६ . ओशिन सिआओ भट्ट सभी समाजों में, माहवारी से जुड़ी वर्जना न केवल इस पर चर्चा करने…
जब शाम ढली, हम सभी सड़क के चिराग हो गए। क्रॉयज़बर्ग बस रौशनी था – और सस्ते कबाब – हरी दीवारें,…
वह एक ऐसे परिवार में बड़ी हुई थीं जहाँ बनने संवरनें की सराहना की जाती थी, इसलिए कपड़ों के प्रति उनकी चाहत को कभी भी विलासिता की तरह नहीं देखा गया। उनकी माँ की शख्शियत की एक विशिष्ट पहचान, उनकी बड़ी सी बिंदी और सूती साड़ी हमेशा अपनी जगह पर रहती थी, चाहे दिन का कोई भी समय हो, चाहे वो खाना बना रहीं हों, धूप या बारिश में बाहर गई हों, सो रहीं हों या बस अभी ही जागी हों, हंस रहीं हों, या रो रहीं हों। उनकी और उनकी बहन के लिए, उनकी माँ की फैशन को लेकर एक ही सलाह थी, “हमेशा ऐसे तैयार होकर रहो जैसे आप बाहर जा रहे हों, भले ही आप सारा दिन घर पर ही हों।” अपनी माँ की सलाह के बावजूद, वह घर पर ‘गुदड़ी के लाल’ की तरह और बाहर जाते वक़्त ‘सिंडरेला’ की तर्ज़ पर चलने वाली बनी।
क्वीयरनेस एक स्वतंत्र पहचान है जो छोटे बच्चों सहित किसी को भी स्वीकार करती है, जो निर्धारित बाइनरी के पथ से अलग चलते हैं।
गुमशुदा घरों से जुडी कहानियाँ आज दुनिया के कोने-कोने में मिलती हैं, लेकिन फिर भी देखा गया है कि लोग…
5 जून, 2016 स्मृति धींगरा वे गर्मियों के दिन थे जब दिल्ली यूनिवर्सिटी का लगभग हर छात्र इंटर्नशिप करने के…
प्रेम के लिए कोई ‘नियम पुस्तक’ तैयार नहीं हो पालगाने ई है और इन भावों को जानने और समझने के लिए बहुत सोच विचार और दिमागी ज़ोर की ज़रूरत होती है।
प्रमदा मेनन एक क्विअर नारीवादी एक्टिविस्ट हैं जो हर उस विषय पर विवेचना करती हैं जिसे वे जटिल मानती हैं।…
क्या वादे समय के साथ बदलते हैं? और क्या वे सच्चे बने रहते हैं?
रुपसा मल्लिक द्वारा लिखित सोमिंदर कुमार द्वारा अनुवादित पिछले दो दशकों से प्रजनन प्रौद्योगिकी (रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी आरटी)[1] का उपयोग आम…
रुपसा मल्लिक द्वारा लिखित सोमिंदर कुमार द्वारा अनुवादित पिछले दो दशकों से प्रजनन प्रौद्योगिकी (रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी आरटी)[1] का उपयोग आम…
अब मेरे लिए दोस्ती, बीडीएसएम और सेक्स के परिदृश्य को समझना, संभालना, पहले की बनिस्बत आसान तो है मगर फिर भी कहीं धुंधली लकीरें हैं।कभी-कभी पुरुष मित्रों की आँखों में थोड़ी सी ज़बरदस्ती दिखती है, उनकी साथियों की आँखों में थोड़ा सा शक, या महिला-मित्रों की आँखों में मेरी यौनिक पहचान के बारे में वही अनचाही अटकलें भी।
सदीयों से हम सबकी प्रेम पाने की आशा जस की तस बनी हुई है। इस सहस्त्राब्दी के आरंभिक वर्षों में…