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भाषा सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, यह पहचान, संबंध और संघर्ष का भी ज़रिया है। भाषा सामाजिक संरचना, पहचान और सत्ता-संबंधों को दर्शाने का भी औज़ार है।
भाषा सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, यह पहचान, संबंध और संघर्ष का भी ज़रिया है। भाषा सामाजिक संरचना, पहचान और सत्ता-संबंधों को दर्शाने का भी औज़ार है।
एक आदमी होने का मतलब है काफी कुछ भी अपने काबू में रखना। अपना व्यवसाय, अपनी भावनाएं, अपना घरबार, और खासकर अपनी यौन ज़िंदगी।
उनकी सेक्सी कहानियों में आनंद और फैंटसी का चित्रण पूरी तरह औरतों की इच्छाओं पर केंद्रित हैं।
कुछ साल पहले ही मुझे एहसास हुआ कि जब भी मैं भविष्य के बारे में सोचती हूँ, तो मेरे मन में हमेशा अपनी सबसे करीबी महिला मित्रों की तस्वीर उभरती है। मेरे हर फ़ैसले पर सबसे ज़्यादा असर उन्हीं का पड़ता है…
दो कविताएं – हवेली आधुनिकता के आवरण में क्षयग्रस्त पारंपरिक पुरुषत्व को दर्शाती है, जबकि चारपाई कठोर और लचीली अभिव्यक्तियों के बीच विरोधाभास प्रस्तुत करती है, जहां जो जिस चारपाई पर बैठते हैं, उसके गुणों को अपनाते हैं, जो भिन्न-भिन्न पुरुषवादी पहचानों का प्रतीक है।
जबकि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारत में क्वीयर लोगों को जुड़ने, ख़ुद को अभिव्यक्त करने और गैर-अपराधीकरण के बाद समुदाय ख़ोजने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं, संबद्धता के विचार अभी भी जाति, वर्ग, सौंदर्यशास्त्र आदि में उलझे हुए हैं जो बहिष्कार को कायम रखते हैं।
पितृसत्तात्मक समाज में, पुरुषत्व एक विशेष प्रकार के व्यवहार के रूप में प्रकट होता है, जैसे नियंत्रण करना और हावी होना, अक्सर हिंसक तरीकों से।
कानूनी नियमों और हिंदी भाषा के व्याकरणिक नियमों में एक ऐसी समानता है जो द्विलिंगी ढांचों अर्थात जेंडर बाइनरी में न आने वाले लोगों को बहिष्कृत करती है। कानून की नींव परिभाषाओं पर आधारित होती है।
अपनी परिभाषा, अर्थ और लांछन के आस-पास की अस्पष्टता के कारण यौनिकता एक अछूता, अनदेखा, और मनाही का क्षेत्र बना हुआ है।
Growing up, for me, has been about accepting that the loneliness and sadness woven into the fabric of my being do not go away with entering conventional arrangements like monogamous relationships or marriage.
In this month’s issue of Play and Sexuality, Wesley D’Souza recounts the time his school put up a production of The Pied Piper of Hamelin, his preparations for its audition, and how the process was intertwined with an exploration and acceptance of his sexuality.
मां बनने के बाद से आत्म-देखभाल पर मेरे नज़रिये में बहुत बदलाव आया है। एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए और उसकी चुनौतियों का सामना करते हुए अपना ख़्याल कैसे रखा जा सकता है?