Sexuality
कुछ साल पहले ही मुझे एहसास हुआ कि जब भी मैं भविष्य के बारे में सोचती हूँ, तो मेरे मन में हमेशा अपनी सबसे करीबी महिला मित्रों की तस्वीर उभरती है। मेरे हर फ़ैसले पर सबसे ज़्यादा असर उन्हीं का पड़ता है…
दो कविताएं – हवेली आधुनिकता के आवरण में क्षयग्रस्त पारंपरिक पुरुषत्व को दर्शाती है, जबकि चारपाई कठोर और लचीली अभिव्यक्तियों के बीच विरोधाभास प्रस्तुत करती है, जहां जो जिस चारपाई पर बैठते हैं, उसके गुणों को अपनाते हैं, जो भिन्न-भिन्न पुरुषवादी पहचानों का प्रतीक है।
हमें नहीं बनना महान
हमें इंसान ही रहने दो।
मैं उन विभिन्न जिमों के बाथरूम में बिताए अपने अनुभवों को याद कर सकता हूँ। पुरुषों का बाथरूम एक अद्भुत जगह होता है यह देखने के लिए कि कैसे यौनिकता अपने अलग-अलग पहलुओं में ज़ाहिर होती है।
हमने सालों में जो हुनर, रिश्तों के जाल और टिके रहने की ताक़त बनाई है, वो सिर्फ़ हाशिए की कहानियाँ नहीं हैं – वो ऐसे औज़ार हैं जिनसे पूरी व्यवस्था सीख सकती है।
अधिकांश पूर्णकालिक (और यहाँ तक कि अंशकालिक लोगों के मामले में भी) घरेलू काम के लिए रखी महिलाएँ जो पैसे कमाती हैं वह उनके काम की तुलना में न के बराबर है, और जो फायदे उन्हें दिए जाते हैं (छुट्टियाँ, स्वास्थ्य देखभाल, पेंशन) वो काम पर रखने वाले की उदारता और अधिकतर उनकी मर्ज़ी पर निर्भर है।
केवल एक तरह से जीवन जीने, या अपनी यौनिकता को अनुभव करने से अधिक और भी बहुत कुछ होता है। इसके लिए ज़रूरी है कि पहले तो हम अपने मन में इसे स्वीकार करें और इसके लिए तैयार हों।
केवल एक तरह से जीवन जीने, या अपनी यौनिकता को अनुभव करने से अधिक और भी बहुत कुछ होता है। इसके लिए ज़रूरी है कि पहले तो हम अपने मन में इसे स्वीकार करें और इसके लिए तैयार हों।
क्वीयर मर्दानगी एक वैकल्पिक मर्दानगी है जो पितृसत्तात्मक और विषमलैंगिक मानदंडों को अक्सर चुनौती देती है और मर्दानगी के स्वरूप को अधिक समावेशी बनाती है।
सम्पादकीय नोट : इस लेख का पहला भाग अप्रैल के पहले संस्करण में प्रकाशित हुआ था सेक्स वर्कर के अधिकारों…
पितृसत्तात्मक समाज में, पुरुषत्व एक विशेष प्रकार के व्यवहार के रूप में प्रकट होता है, जैसे नियंत्रण करना और हावी होना, अक्सर हिंसक तरीकों से।
कानूनी नियमों और हिंदी भाषा के व्याकरणिक नियमों में एक ऐसी समानता है जो द्विलिंगी ढांचों अर्थात जेंडर बाइनरी में न आने वाले लोगों को बहिष्कृत करती है। कानून की नींव परिभाषाओं पर आधारित होती है।
अपनी परिभाषा, अर्थ और लांछन के आस-पास की अस्पष्टता के कारण यौनिकता एक अछूता, अनदेखा, और मनाही का क्षेत्र बना हुआ है।
किशोरों में यौनिकता विषय पर चर्चा करना आरंभ करने पर कानून, आयु, मान्यताएँ व स्वास्थ्य जैसे अनेक ऐसे मुद्दे भी…