हिन्दी
इसलिए, तुम्हारे आज के स्वः या अवतार के रूप में, मैं तुम्हें अपनी क्षमताओं में विश्वास रखने के लिए प्रोत्साहित करती हूँ, अपने सपनों पर केंद्रित रहना, एक स्वाभाविक मूल्य प्रणाली विकसित करना जो हठधर्मिता से मुक्त हो, हमेशा जिज्ञासु बनी रहना और निरंतर सीखने की अपनी इच्छा का पोषण करना, और अपना जीवन स्वतंत्र रूप से और पूरी तरह से जीना।
विविधता शब्द सुनते ही बरबस मेरा ध्यान तीन बातों की ओर खिंच जाता है – साम्राज्यवाद, राष्ट्रीय एकता से जुड़े…
केवल एक तरह से जीवन जीने, या अपनी यौनिकता को अनुभव करने से अधिक और भी बहुत कुछ होता है। इसके लिए ज़रूरी है कि पहले तो हम अपने मन में इसे स्वीकार करें और इसके लिए तैयार हों।
क्या यह मेरे पिता की गलती थी? शुरू में, मुझे लगा कि यह उन्हीं की गलती है, लेकिन फिर मुझे समझ में आने लगा कि वह स्वयं इस स्थिति में असहाय हैं।
कुछ अधिकार ऐसे होते हैं, जिन्हें जब तक छीन न लिया जाए, उनके होने का एहसास ही नहीं होता। तुम्हारे लिए किसी लड़की को पसंद करना, प्यार में पड़ना, उनके बारे में अपने दोस्तों से और परिवार वालों से बात करना बिलकुल स्वाभाविक है। तुम जैसा सोचते हो, जैसा महसूस करते हो वह आसानी से कह सकते हो।
अस्वस्थ्य मर्दानगी या विषाक्त पुरुषत्व का हिंसक होने के लिए ज़रूरी नहीं है कि जाहिर तौर पर मौखिक या शररिक रूप से घातक हो। इसके लक्षण रोज़मर्रा के वार्तालाप या अंतरंग बातचीत से भी सामने आते है।
प्रतिमा का यह एक-चला रूप, जिसकी उपासना पहचान और पहचान की राजनीति से जुड़े क्विअर समुदाय के लोग करते हैं, जैविक सम्बन्धों और विषमलैंगिकता के विचार पर बनी परिवार की इस परिभाषा को चुनौती देता है।
मोहनस्वामी – लेखक वसुधेंद्र अनुवाद – रश्मि तेरदल (हार्पर पेरेनियल Harper Perennial, 2016) जब मैं छात्र जीवन में पढे गए…
मैं घर के बैठक वाले कमरे में दाखिल हुई तो पाया कि वहाँ एक अंजान सी खामोशी पसरी हुई थी।…
कुमाम डेविडसन एक स्वतंत्र पत्रकार, ऐक्टिविस्ट और शिक्षक हैं। वे पूर्वोत्तर भारत में क्विअर विषयों पर डिजिटल और प्रिंट सामग्री…
मेट्रो ट्रेन, दिल्ली शहर और यहाँ के जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुकी हैं। आज मेट्रो के बिना दिल्ली…
वापस फिर एक बार, पोस्टर पर लिखी गयी घोषणा पर लौटते हुए – पहली बार ‘कानूनन’ सेक्स कर पाने के अपने अनुभव को ज़ाहिर करने की इस घोषणा में एक बहुत ही शक्तिशाली सांकेतिक संदेश निहित है जो हमें सेक्स में ज़्यादा चरम आनंद लेने में भले ही मदद न करे लेकिन मुक्ति के चिन्ह हमेशा धनी लोगों द्वारा किए जा रहे दिखावे की तरह नहीं होते, उनमें एक प्रभावी संदेश निहित होता है।
नेपाल में छोटी उम्र में विवाह हो जाने का प्रचलन है। यूनिसेफ़ की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में 37% लड़कियों…
केवल एक तरह से जीवन जीने, या अपनी यौनिकता को अनुभव करने से अधिक और भी बहुत कुछ होता है। इसके लिए ज़रूरी है कि पहले तो हम अपने मन में इसे स्वीकार करें और इसके लिए तैयार हों।
आज के समय में जब विश्व में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की घटनाएँ बढ़ी हैं और सामाजिक मान्यताओं में भी बदलाव आया है, ऐसे में केवल विवाह ही, महिलाओं के एक जगह से दूसरी जगह प्रवास करने का एकमात्र कारण नहीं रह गया है।