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CategoriesFilms and Sexualityहिन्दी

सिनेमा, संगीत और सहमति पर बातचीत

कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर रोबिन थक  के गीत ‘ब्लर्ड लाइन्स’ और उसके विडियो के बारे में बड़ी चर्चा हो रही थी जिसने लोकप्रिय सांकृतिक कथानकों में सहमति और शोषण के बीच की रेखा को धूमिल कर दिया था।

इस चर्चा ने मुझे हमारे उन देसी गीतों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया जो विवादस्पद रहे हैं।

एक युवा ट्रेनर होने के नाते, मैं अक्सर ऐसे गीत और किरदारों से परिचित होता हूँ जिनकी आज के युवा कल्पना करते हैं। एक सदियों पुरानी खराबी, जो विशेषकर बॉलीवुड के गीतों में दिखती है,  बहुत सरसता से इस पोस्टर में प्रस्तुत की गई है:

तो इस चर्चा को शुरू करने के लिए हम जो देखते हैं उस पर एक सामूहिक प्रतिक्रिया शायद दिलचस्प होगी।

कुछ साल पहले, निदेशक सिद्धार्थ आनंद ने एक दिलचस्प तरीके से, हमें ‘बचना ऐ हसीनों’ गीत का रीमिक्स दिया जिसमे ऋषि कपूर की जगह उनके बेटे रणबीर पर यह गाना फिल्माया गया।

जब तक मैंने वास्तव में रैप के बोल पर ध्यान नहीं दिया था तब तक कई पार्टियों में इस नए हिट नंबर पर डांस किया। मुझे इसके बोल तो इन्टरनेट पर सहजता से मिल गये, पर इन्हें पढना एक असहज अनुभव था।

“येः (yeah)! बेबी व्हेन यू सी मी

कम्मिंग येः!

येः यू बेटर रन फॉर कवर

येः

बिकॉज़ यू नो व्हेन आई फंड यू

येः

येः आई ऍम गोंना बी योर लोवर …

… बचना ऐ हसीनो

लो मैं आ गया”

इस गाने को सुनकर, मेरे ज़हन में पहले विचार उत्पीड़न, हिंसा, बलात्कार थे और ना कि प्यार के। ये सही है कि यह फिल्म एक युवा लड़के के बारे में है जो उन महिलाओं से क्षमा मांगता है जिन्हें पहले वो अपनी जीत की ट्राफी मानता था लेकिन जब हम रेडियो, टीवी और इंटरनेट पर यह गाना सुनते हैं और पार्टियों में इसी गाने पे डांस करते हैं तो फिल्म का यह सन्देश कहीं खो जाता है।

हाल ही में फिल्म फटा पोस्टर निकला हीरो का एक गीत एक और उदाहरण बनकर सामने आया जिसके बोल इरशाद कामिल ने लिखे हैं। यह गाना शाहिद कपूर पर फिल्माया है और गाने को देख कर यह आसानी से कहा जा सकता है कि यह भारत के वर्तमान कानून के तहत यह यौन उत्पीड़न है, फिर भी फिल्म में यह गाना मज़ेदार और ‘लड़के तो लड़कों के जैसे ही व्यवहार करेंगे’ वाले नज़रिए से दर्शाया गया है।

इस गीत की प्रतिक्रिया में कुछ युवा लोगों ने हीरो को बिंदास और आत्मविश्वास से पूर्ण बताया तो कुछ ने उन्हें शोषण करने वाला भी बोला और निंदा की। जाहिर है, अलग-अलग लोग गीत को अलग-अलग तरीके से देखते है, इसलिए सामान्यीकरण करना सही नहीं होगा।

गाने अक्सर फिल्मों से अधिक लोकप्रिय होते है और अपने अलग ही मतलब का निर्माण करते हैं। इनका मतलब उनता ही विविध है जितना इनको सुनने वाले लोग। मैं यह बिल्कुल नहीं मानता कि हम जो फिल्म और चित्र देखते है उसका हमारे जीवन पर सीधा असर पड़ता है। हिंसक या अन्यथा मूर्खतापूर्ण कार्यों के लिए दोषी वह ही हैं जो यह कार्य करते हैं और वे जो उन्हें बेहतर शिक्षा दे सकते थे पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। शिक्षा और बातचीत से हम युवाओं को सही समझ और बेहतर निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाते हैं।

जब हम लोकप्रिय संस्कृति के बारे में सोचते हैं तो हम भी राजनैतिक पार्टीयों और नैतिक दल के उस सामान्यीकरण के शिकार हो सकते हैं जो मानते हैं कि सेक्स एवं यौनिकता हर रूप में खराब हैं। हमें यह समझने की ज़रूरत हैं कि शीला का अपनी जवानी पर गाना गाना हनी सिंह के गाना गाने से बहुत अलग हैं जो की हिंसक और निंदनीय होते है।

पर जहाँ संगीत में हिंसा प्रचुर मात्र में बढ़ रही है जैसे कि ऊपर उल्लेखित दो गानों में दिखती है (बचना ऐ हसीनों और अगल बगल), हम महिला की यौनिकता की छवि के अव्यक्तिकरण एवं वस्तु मात्र प्रदर्शन पर असहमति प्रकट करते हैं।  

अगर बहुत ख़राब हुआ तो हम महिला की इज्ज़त के नैतिक रखवाले बन जाते हैं और कुछ बेहतर स्थिति में हम शर्मिंदा हो जाते हैं, ठीक उसी तरह जैसे ‘मेरे डैड की मारुती’ फिल्म में उस युवा महिला का इज्ज़तदार परिवार हुआ था जब वो महिला अपनी ही शादी के उत्सव में अपने ही पति के लिए प्रेम का गीत गाने के बजाए सेक्स के बारे में गाना चुनती है।

आज के युग में, मीडिया के उपभोगता अपनी कहानी स्वयं बनाने और उसे दूसरों को दर्शाने में पूरी तरह सक्षम है, वो कहानी जो उनके लिए अधिक मायने रखती है और उस कहानी से कहीं अधिक विविध है जो मीडिया जगत उन्हें ज़बरदस्ती परोसने की कोशिश करता है। इसका एक बड़ा उदाहरण हैं यह पंजाबी धुन जो मैंने कुछ साल पहले एक सुपरमार्केट में खरीदारी करते समय सुनी थी। मुझमें गीतों के बोल जानने की एक सनक सी है और अक्सर मुझे जो गीत पसंद आते है मैं उनके बोल को खोजकर उनके मतलब को समझने की कोशिश करता हूँ। मेरे पसंदीदा कई अन्य पंजाबी गीतों की तरह ही  (और मैं कबूल करना चाहता हूँ कि उनमें से कुछ हनी सिंह द्वारा गाये गये हैं) यार अन्मुल्ले की  धुन भी लोकप्रिय है, लेकिन बोल जानने के बाद यह गीत उतना दिलकश नहीं रहा।

पितृसत्तात्मक यादों को जताते हुए गायक कॉलेज में दोस्तों के साथ बिताए समय के बारे में गाते हैं। इस गीत में पारंपरिक छवियों को प्रस्तुत करते हुए, जश्न मनाना, महिलाओं को घूरना, बाइक की सवारी और अन्य व्याख्यनों को एक रोमांचक समय की तरह दर्शाया गया हैं।

यूट्यूब पर खोज करने पर इस गीत का एक अलग संस्करण मिला जो महिलायों द्वारा गया गया हैं कुछ अलग झुकाव के साथ। उपयोगकर्ताओं द्वारा इस गीत को महिलाओं के एक दूसरे के साथ के एक अलग तरह के बंधन के संस्मरण के रूप में देखा गया और यह गीत लिंग आधारित चयनात्मक गर्भपात के बारे में एक संदेश के रूप में बदल गया।

डिजिटल युग में व्याख्यान के प्रसार नए अर्थ और पहचान पैदा कर रहे हैं। हम बस यह कर सकते हैं की,  इन्हें अधिक से अधिक सार्थक बनाये और सुनिश्चित करें कि हमारे युवा इसका सही अर्थ समझें।

मेधा कलसी द्वारा अनुवादित

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Cover Image: NDTV

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Article written by:

Manak is a feminist, queer activist, an Acumen Fellow and the Executive Director of The YP Foundation. Manak's work is aimed at facilitating young people's rights based leadership on issues of Gender, Sexuality, Health, Education and Civic Participation.

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