बर्लिन में

An abstract painting of various shades of green and blue

जब शाम ढली,

हम सभी सड़क के

चिराग हो गए।

क्रॉयज़बर्ग बस रौशनी था – और सस्ते कबाब –

हरी दीवारें, चरमराते दरवाज़े

फुटपाथ और

लड़के।

एक गोरा जर्मन, लम्बा,

जिसने पिछले साल लंदन के एक कमरे में

अपने बॉयफ्रेन्ड को खोया था –

सारी रात उसी की बातें करता रहा।

लगभग सात फीट का, और

उसकी आखें – सिर्फ आरज़ू।

एक अमरीकी स्टूडेंट, उसका दोस्त

जिसके दिमाग में सिर्फ सेक्स था – बिलकुल हमारी तरह –

जो किसी टी-शर्ट पर लिखी चीज़ों जैसे बातें करता,

जिसके चेहरे पर मुस्कान सिली हुई थी, और जिसने

हम में से सबसे ज़्यादा पी थी।

एक मराठी लेखक – जिससे मैं बाद में मिलता रहा –

जिसकी छ: महीने की सीखी जर्मन, इतनी दिलचस्प थी

कि सिर्फ़ उसका “दान्के” सुनने के लिए

हम बियर बार बार मंगाते रहे।

एक और लड़का, जो

बार पर बस टिका सा था, जो

स्टूल पर बस बैठा सा था –

जिसकी काली शर्ट पसीने से ठण्डी हो चली थी

और जिसकी आँखें सिर्फ व्हिस्की थीं,

वो देर रात तक वहां रहा – फिर शायद

मिस्टर “दान्के” के साथ गया था,

और एक डच लड़का जिसके नाम का मतलब ‘रौशनी’ था

जिसने मुझे बर्लिन का सबसे खूबसूरत हिस्सा दिखाया

एक छोटे से होटल का छोटा सा कमरा

यू-बॉन से बस चार स्टेशन दूर,

वो कमरा, जिसके बाद जब सुबह आई

हर तरफ सिर्फ सूरज था, सिर्फ सूरज था हर तरफ

जब सुबह आई

बर्लिन में, उस रात।

 

दीपिका श्रीवास्तव द्वारा हिंदी में अनुवादित

Painting By Georgia O’ Keeffe (Public Domain)