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लकड़ी के तल वाले कमरे में काले रंग के परदे लगे है, जिसमे कुछ लड़कियां आपस में रंग बिरंगे रिब्बंस के साथ खेल रही है
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आत्मबोध व अभिव्यक्ति – डांस मूवमेंट थेरेपी

शुरुआत करने के लिए सबसे बेहतर जगह है, आपका अपना शरीर। स्पंदन जो आपके छिद्रों से आरंभ होता हो।

मुंह से शब्द प्रस्फुटित हो, इससे पहले हमने नृत्य शुरू कर दिया। नृत्य के माध्यम से हम दुनिया के सामने प्रस्तुत होने लगे, अपनी अंगुलियों को सुरक्षा घेरे की तरह करते हुए, हमने रंगों के उद्गारों को महसूस किया, डर न जाने कब दूर होता गया और हमने अपनी आँखें बंद कर ली। नृत्य करते हुए हम आनंद से आच्छादित हो गए, क्षितिज की ओर बढ़े, वर्षा की बूंदों के बीच नृत्य जारी रखा। समय के साथ हमने और सीखा, और सीखने की उत्सुकता के मारे दोहरे होने लगे….नृत्य की मुद्राओं में अपनी हथेलियाँ और पैरों को खोल कर दुनिया को करीब से जानने लगे।

वाक कला सीखने से पहले हमने अपने इस शरीर और नृत्य के माध्यम से अपने विचार प्रकट करना सीख लिया। हमारे शरीर हज़ार बातें कहते हैं लेकिन हम तो कदाचित केवल शब्दों को ही सुन पाने के लिए प्रशिक्षित हैं।

शब्द विचारों को प्रकट करने के सुनियोजित, जाने-पहचाने और नियंत्रित माध्यम या विधा है। शरीर की हलचल इसके ठीक विपरीत, मन की बात बताने का पवित्र प्रतिरूप है। जब नृत्य आपके लिए सुनने का माध्यम बन जाता है, आप अपने शरीर और मस्तिष्क की ताल पर मुग्ध होते हैं, तभी आपके नृत्य की भंगिमाएँ पूर्णत: सच को अंगीकार कर लेती हैं। और इस जगत में जहां नृत्य को न समझना ही जैसे मनुष्य का प्रारब्ध है, इसी सत्य को पा लेना मानो आपके जीवन को बदल देने वाला अनुभव हो सकता है।

कोलकाता संवेद की शोहिनी चक्रोबर्ती के साथ मैंने पहली बार नृत्य के माध्यम से उपचार (डांस मूवमेंट थेरेपी) कार्यशाला का अनुभव लिया था और तब मुझे एहसास हुआ कि नृत्य और संचालन वास्तव में एक अद्भुत और आकर्षक भाषा संवाद का माध्यम हो सकते हैं। काउन्सेलिंग विज्ञान की प्रथम वर्ष की छात्रा और नृत्य के प्रति आकर्षित हुई मैं, इस तीन दिवसीय डांस मूवमेंट थेरेपी वर्कशाप  में पहुंची तो नहीं जानती थी कि वहाँ मेरे अनुभव किस तरह के रहेंगे। मुझे लगता था कि वर्कशाप में थेरेपी सीखने के ‘गंभीर’ (मौखिक) सत्रों के बीच शायद हम नीरसता को दूर करने के लिए नृत्य करने जैसे कुछ अभ्यास करेंगे, लेकिन यहाँ पर तो बहुत कुछ था। शरीर के माध्यम से नृत्य द्वारा खुद को जानने की कोशिश में जब मैंने नृत्य करना शुरू किया तो मैं कह सकती हूँ कि मेरे अंदर की लेखिका एकदम नि:शब्द होने लगी; मेरे पास सोचने और कहने के लिए शब्द शेष नहीं बचे थे। डांस मूवमेंट थेरेपी वर्कशाप के उन तीन दिनों में मुझे पता चला कि मेरे मन, मस्तिष्क और शरीर के बीच जैसे कोई सामंजस्य था ही नहीं, और कैसे आमतौर पर पारंपरिक मौखिक कार्यशालाओं में शरीर और मन के बीच के इस संबंध को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। वर्कशाप के बाद एक नयी दैहिक जागरुकता और बोध के साथ फिर अपने काम पर लगना एक बेहद सशक्त करने वाला प्रगाढ़ अनुभव हो सकता है क्योंकि अब हम शब्दों की घुसपैठ के बिना भावनाओं को व्यक्त करना शुरू करते हैं। कभी-कभी हम शरीर की भाव-भंगिमाओं से वह सब कह सकते हैं जो हम अपनी आवाज़, अपने शब्दों से बयां नहीं कर पाते।

तो इस संवाद प्रक्रिया को हम कैसे और कहाँ से शुरू करें?

भारत में शायद सबसे पहली प्रशिक्षित डांस मूवमेंट थेरेपी की विशेषज्ञा और भारत में क्रिएटिव मूवमेंट थेरेपी एसोशिएशन की संस्थापिका त्रिपुरा कश्यप इस प्रश्न के उत्तर में नृत्य गति की शब्दावली विकसित करने, भाव प्रदर्शन सीखने, रचना और समायोजन करने पर बल देती हैं। इन सभी प्रक्रियाओं को अपनाने का अभ्यास अपने आप में मौलिक और बदलाव लाने वाला अनुभव है – क्योंकि इसमें न सिर्फ मस्तिष्क, बल्कि शरीर का और न केवल शब्दों, बल्कि भंगिमाओं का प्रयोग भी सम्मिलित रहता है – साथ ही इसमें अप्रत्याशित और मूल वृत्ति के भावों को अपनाना, जानना कि मूल वृत्ति का भाव क्या है और प्रशिक्षण के दौरान औपचारिक क्या बताया जा रहा है, उसे समझना भी शामिल हैं।

महिलाओं के तौर पर, हमें कुछ खास तरीकों से दुनिया में रहने, चलने, भंगिमाएँ करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। हमारे ये ‘स्त्री सुलभ’ तरीके – सरल हो, कुछ अलग हो, लेकिन निश्चित रूप से दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट न करते हो। हमारी संस्कृति में हमें बताया जाता है कि हमारा चलना, बात करना, सब कुछ शांत, विनम्र और विवेकपूर्ण होना चाहिए, और हमारे भाव इससे मेल खाने चाहिए। आपका सीना, थोड़ा अंदर की ओर खींचा हुआ हो। एक महिला में आत्मविश्वास, उत्साह और कामुकता विचलित करने वाली होते हैं, और दूसरों के ध्यान, संदेह और आक्रामकता को आमंत्रित करते हैं।

इसके ठीक विपरीत, डांस मूवमेंट थेरेपी के विशेषज्ञ अपने छात्रों और लाभार्थियों को विभिन्न रूपों, लय, तरीकों और गति का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित कर गहरी बैठी शारीरिक कंडीशनिंग* (और कई अन्य रूपों) का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करते  हैं। आपके शरीर को व्यवहार या हरकत करने का जो मर्दाना या स्त्री सुलभ तरीका आता है, डांस मूवमेंट थेरेपी विशेषज्ञ आपको उन तरीकों से परे हटकर अपने मनचाहे तरीके से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि आप अपनी गति में अपनी सामाजिक कंडिशनिंग नहीं, बल्कि अपने भावों को महसूस करें। एक महिला अपने पैरों को खोल कर, चौड़ा कर चल सकती है, एक पुरुष बड़े ही नाज़ुक रूप से घूम सकता है – और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके चलने का तरीका, आपकी गतियाँ आपके जेंडर से मेल खाती हैं या नहीं। यहाँ हमारा ध्यान सुंदर या सुशोभित दिखने पर नहीं है – और प्रशिक्षक/प्रशिक्षिका कभी भी आपके कदमों या चलने के तरीके में कोई ‘सुधार’ करने का सुझाव नहीं देते, बल्कि यहाँ पूरा ध्यान केवल इस पर होता है कि कोई जिस तरह से चलता है उसके प्रति एक सहज स्वीकार्यता होनी चाहिए ताकि आप यह समझ सकें कि अनेक तरह की चाल, गति, भावों और भंगिमाओं और लय की भीड़ में भी एक विस्तृत खोज संभव है। ऐसा करते हुए भाव प्रदर्शन की एक शब्दावली निर्मित हो पाती है जो हमारे शरीर की अभ्यस्तता से परे है। इसी पर आगे और अन्वेषण और प्रयोग करने से अभिव्यक्ति निकलती है। सत्रों को अक्सर मुक्त गति के अनुक्रमों या सुधारों और समान भावों पर आधारित कर बदलाव लाने हेतु विभाजित किया जाता है। यह सब अनुभव किंचित अनबूझ यादें उत्पन्न करने में समर्थ होते हैं। ‘जब हमने वह अभ्यास किया था जैसे हम टूटे हुए काँच पर चल रहे हैं तब मुझे ऐसा ही लगा। यह बिलकुल वैसे ही मुझे याद आया जब हमने अपनी कलाइयों का इस्तेमाल नृत्य के लिए किया था।’

हमारे शरीर हमारे उन जीवन अनुभवों के संचय स्थल होते हैं जो हम अपने पूरे जीवन में पाते रहे हैं। हमारे पास मौजूद हर एक स्मृति का हमारे मस्तिष्क पर तरंगित प्रभाव होता है। याद कीजिए वह समय जब आपके शिक्षक/शिक्षिका आप पर चिल्लाए थे तो कैसे आपके घुटने कांपने लगे थे। आपकी प्रवेश परीक्षा के परिणाम आने से पहले पूरी गर्मियों की छुट्टियों में आपके पेट में रहने वाली कैसी बेचैनी की भावना बनी रही थी। जब कोई हमें हमारी इच्छा के विरुद्ध छूता है तो कैसा प्रचंड क्रोध का भाव पैदा होता है। ये ऐसी संवेदनाएँ हैं जिन्हें हमने अनुभव किया है, जिन्हें हम कभी-कभी मौखिक रूप से व्यक्त करने में खुद को असमर्थ पाते हैं। शरीर के साथ काम करते हुए हम संवेदनाओं के अनाम, अज्ञात क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, और शब्दों के बजाय हम महसूस की गई उन संवेदनाओं के साथ काम करते हैं जो अभ्यास के दौरान हमारे सामने उभरती हैं। उदाहरण के लिए, यौन आघात का अनुभव कर चुके लोगों में अभिघातजन्य तनाव विकार के लक्षण उभरते हैं (PTSD symptoms), और वे अपने शरीर में ही सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। अपने शरीर के साथ इतने गहरे उल्लंघन और शारीरिक निस्सहायता का अनुभव करने के बाद वे अक्सर अपने और अपने शरीर के प्रति संवेदनहीनता, शर्म या क्रोध महसूस करने लगते हैं। डांस मूवमेंट थेरेपी सत्रों में शरीर को इशारों, गति, लय, भावों के माध्यम से भावनाओं को संप्रेषित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यदि आघात से गुज़रे हुए लोग मौखिक रूप या खुद से अपनी बात साझा करने की आवश्यकता महसूस करते हैं तो उनकी बात सुनी जाती है और उन्हें मान्य किया जाता है। गैर-मौखिक स्तर पर, रेचन और स्वयं द्वारा शरीर के प्रति पुनः स्वीकार्यता विकसित करने के साथ-साथ अनुभवों की नाज़ुकता  और उनकी शक्ति का अनुभव होता है। आघात से गुज़रे हुए या किसी तरह के उल्लंघन का सामना कर चुके लोगों के लिए डीएमटी (डांस मूवमेंट थेरेपी) का सबसे उपचारात्मक पहलू शारीरिक स्वायत्तता और शक्ति विकसित कर पाने की भावना है। आप अपने शरीर के प्रभारी हैं, इस पर पूरा आपका और केवल आप ही का हक़ है, और केवल आप ही तय करते हैं कि आप कैसे आगे बढ़ना चाहते हैं। डांस मूवमेंट थेरेपी सत्र जीवंत, जीये गए अनुभवों को आपके सामने उत्पन्न कर देती है जहां उत्तरजीवी दर्द के साथ-साथ शक्ति, आक्रामकता, क्रोध और ताकत भी व्यक्त की जा सकती है। एक समूह में उत्तरजीवी लोग दूसरों के अनुभवों को देख सकते हैं और उन भावनाओं के साथ संघर्ष कर सकते हैं जो उनके अपने अनुभवों को मान्य करने का एक शक्तिशाली तरीका है।

लगातार एक ऐसे स्थान में रहते हुए जहां आप खुद अपने शरीर के प्रभारी हैं – आप अपने शरीर की कमज़ोरियाँ, इसकी  अरण्यता, इसकी थकान, इसमें चल रही उथल-पुथल और ऊर्जा का भी अनुभव करते हैं – और इसके साथ ही लोग इसकी लय से परिचित होना शुरू कर देते हैं और स्वयं के करीब हो जाते हैं। यहां मनोदैहिक स्तर पर संकल्प होता है। थेरेपी विशेषज्ञ छात्र या लाभार्थी की गति, भाषा, भंगिमाओं का निरीक्षण करते हैं, वे उनके ताल, लय, गति में दोहराव वाले स्वरूप, उनके अर्थ और अंतर्निहित भावनाओं को समझते और तलाशते हैं। गति, ताल, लय और मुद्राओं के माध्यम से उत्पन्न होने वाले रूपकों को समझकर और उन्हें मान्य करने से मन और शरीर के बीच एकीकरण उभरता है। अक्सर, जिन लोगों को अपनी कुछ भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई होती है, वे शारीरिक रूप से उन्हें व्यक्त करने के बाद उनके द्वारा कम खतरा महसूस करना शुरू कर देते हैं – और न ही उनके बारे में अधिक गहराई से बोलना शुरू करते हैं परन्तु उन्हें अलग तरह से अनुभव भी करते हैं। उनका दैनिक जीवन और बातचीत अक्सर बदल जाते हैं। मानव तस्करी से बचाए गए लोगों के एक समूह के साथ कोलकाता संवेद के काम ने इस वास्तविकता का दस्तावेजीकरण किया। जिन लोगों ने 6 महीने की अवधि में डांस मूवमेंट थेरेपी का अनुभव किया था, उन्होंने अधिक आराम से आंखों से संपर्क बनाने, मुखर होने और अपने और अपने शरीर के बारे में अच्छा महसूस करना शुरू कर दिया।

मूवमेंट पर काम करने वाले चिकित्सकों/विशेषज्ञों के बीच ‘डांस मूवमेंट थेरेपी’ वाक्यांश के प्रयोग को लेकर अक्सर बहस होती है। जिस तरह से अधिकांश लोग ‘नृत्य’ देखते हैं, वह कुछ ऐसा है जिसे सीखा जाता है, इसका अभ्यास किया जाता है, और यह उत्तेजित करने, मनोरंजन या जश्न मनाने के लिए उपयोग किया जाता है। फिर भी चिकित्सीय उपचार के लिए हम गतिशीलता और नृत्य के रचनात्मक कोरेपन पर काम करते हैं और इसका एकमात्र उद्देश्य भावों को व्यक्त करना है। प्रयास करने के लिए शारीरिक पूर्णता का कोई मानक नहीं है लेकिन गहरी भावनात्मक ईमानदारी इसके लिए बहुत आवश्यक है। त्रिपुरा कश्यप ने अपने संस्थान का नाम क्रिएटिव मूवमेंट थेरेपी एसोसिएशन ऑफ इंडिया रखा है, जो नृत्य की पारंपरिक, लोकलुभावन धारणाओं और गति व नृत्य से उपचार की चिकित्सीय वास्तविकताओं के बीच अलगाव को उजागर करता है।

कला और डांस मूवमेंट थेरेपी के बीच सम्बन्ध गहरा रहे हैं लेकिन अगर इसके मूल में कला ही इस बात की अभिव्यक्ति है कि दुनिया में जीवित रहने का क्या मतलब है (सौंदर्यशास्त्र की विषयपरकता पर बहस को अलग रखते हुए), तो इससे जुड़े लोगो में कला विकास की संभावना शामिल है। डांस मूवमेंट थेरेपी प्रदर्शन पर केंद्रित नहीं है, बल्कि आपके भीतर एक जगह को विकसित करने पर बल देती है, जहां से अभिव्यक्ति स्वाभाविक रूप से उभरती है, जिससे शरीर को अपने स्वयं के रूपकों के माध्यम से सौंदर्य बोध की नियंत्रण का सामना किए बिना आगे बढ़ने की इजाज़त मिलती है।

प्रत्येक मानव शरीर को सुंदर या मर्दाना या सामाजिक रूप से उपयुक्त दिखने के दबाव के बिना चलने की अनुमति देकर हम स्वतंत्रता की एक छोटी लेकिन शक्तिशाली पेशकश करते हैं। हम एक ऐसी जगह खुद को पाते हैं जहां हमें केवल यह जानना चाहिए कि हम कौन हैं, और जो हमारे अंदर चलता है उसे व्यक्त करें। और यह कला सबसे जीवंत और सहानुभूतिपूर्ण है क्योंकि यह हमें स्वतंत्र होने और बिना किसी अवरोध के स्वयं और अपनी कहानियों को व्यक्त करने के लिए आमंत्रित करती है। एक दिन जो लड़की हमेशा अपने पैरों को एक के ऊपर एक करके रखती थी, वह ऐसा करना बंद कर देती है। उसके एक हफ्ते बाद, वह नृत्य करती है, अपने पैरों से ज़मीन पर थाप देती है और अब उसकी निगाहें फर्श से उठ ऊपर देखने लगती हैं।

यदि सक्रियता (ऐक्टिविज़्म) एक राजनीतिक या सामाजिक व्यवस्था को बदलने के लिए अभियान चलाने के बारे में है, तो स्वतंत्र रूप से चलना उसी व्यवस्था में सन्निहित संरचनाओं को तलाशने और उन्हें बदलने का एक तरीका हो सकता है। हो सकता है कि अब से एक महीने बाद, वह लड़की सड़क पर उतरे और किसी को अपनी ओर घूरते हुए देखे। और तब ऐसा होगा कि अपने जीवन में पहली बार वह झुकेगी नहीं और न ही ज़मीन में आखें गढ़ा लेगी बल्कि वह वापिस और तीव्रता से घूरकर सामने वाले को देखेगी। हो सकता है कि उस घूरने वाले की निगाह नीचे झुक जाये या यह भी हो सकता है कि वह फिर भी उस लड़की की ओर देखता रहे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क यह पड़ता है कि अब वह नज़रें फेर कर परे नहीं देखेगी, क्योंकि अब आखिरकार वह खुद को काफी सशक्त महसूस करती है। मेरा मानना है कि यही मायने रखता है, क्योंकि मैं भी उन हालातों को अनुभव कर चुकी हूँ जो वह इस समय कर रही है। और अधिक स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने, बोलने और जीने के प्रयास में हम कलाकार और ऐक्टिविस्ट दोनों ही हैं।

*रीति-विशेष से अनुकूलित बरताव

(त्रिपुरा कश्यप के प्रति विशेष आभार, जिनके प्रशिक्षण और डांस मूवमेंट थेरेपी विधि पर विस्तृत समझ इस लेख का आधार बनी। साथ ही, विशेष आभार आर्टस्फीयर, पुणे की संस्थापक अनुभा दोशी को, जिन्होंने डीएमटी समुदाय के उभरने के लिए एक मंच उपलब्ध करवाया और फोटोग्राफी के लिए वरुण विश्वेश को, विशेष आभार।)

चित्र स्रोत: पुणे के आर्टस्फीयर में डीएमटी कार्यशाला के दौरान वरुण विश्वेश द्वारा। कॉपीराइट आर्टस्फीयर का है।

लेखिका: अर्पिता बोहरा

अर्पिता अधिक लोगों के लिए डांस मूवमेंट थेरेपी सत्र लाने की दिशा में प्रयासरत रही हैं और उन अनेक तरीकों को समझ रही हैं जिनसे उपचार और रोग मुक्त हो पाना संभव हो सकता है। वह एक लेखिका हैं और साथ ही एक प्रशिक्षु डांस मूवमेंट थेरेपिस्ट भी, जिन्हे टिस (TISS), मुंबई से काउंसलिंग में स्नातकोत्तर प्राप्त है। उनके अन्य लेख आप angelwitchdiaries.blogspot.com पर पढ़ सकते हैं।

सोमेंद्र कुमार द्वारा अनुवादित

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Article written by:

Arpita is bringing Dance Movement Therapy sessions to more people and understanding the multiple ways that healing and recovery are possible. She's a writer and a dance movement therapist-in-training who holds a Master's in Counselling from TISS, Mumbai. Read more of her writings at angelwitchdiaries.blogspot.com.

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