A digital magazine on sexuality in the Global South

Author: Shweta Krishnan

इच्छाएँ और विविधता पर आम दृष्टिकोण – विचारणीय मुद्दा

विविधता शब्द सुनते ही बरबस मेरा ध्यान तीन बातों की ओर खिंच जाता है - साम्राज्यवाद, राष्ट्रीय एकता से जुड़े संदेश और उदार बाज़ार व्यवस्था। ऐसे में मैं यह तो नहीं कह सकती कि मैं संसार की मौजूदा व्यवस्था से पूरी तरह संतुष्ट हूँ। अगर हम अनेक संभावनाओं वाली समावेशी राजनीति के संदर्भ में विविधता…
a picture of a 'gents' and 'ladies' toilet

महिला शौचालय और मेरा अनुभव 

अलग-अलग शौचालय बनाने के अपने लाभ हैं, विशेषकर जब कि एक जेंडर को दूसरे जेंडर से खतरा महसूस होता हो। लेकिन इस पूरे कृत्य को सामान्य बना देने और इसे जेंडर भेद से दूर करने से संभव है कि महिलाओं को, जहाँ कहीं भी वे हों, प्रयोग के लिए आसानी से शौचालय उपलब्ध हो सकें। 

अजब तमाशा (फ्रीक शो) – प्रदर्शनी के लिए सजे मानव शरीरों की पड़ताल

और एक बार फिर यहाँ कार्निवाल को सफलता मिलती है। सबसे पहले ही एपिसोड में, 'सामान्य' नायक बेन, जो टेंट लगा कर अपनी मज़दूरी कमाते हैं, पहली बार छिपकली मानव गेको से टकराते हैं। गेको को त्वचा रोग है जिसके कारण पूरे शरीर में उनकी त्वचा पर मोटी, हीरे के आकार की, फीकी पपड़ी सी बन जाती है। इसके अलावा, उनकी कड़े बालों की पूँछ है।
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