A digital magazine on sexuality in the Global South: We are working towards cultivating safe, inclusive, and self-affirming spaces in which all individuals enjoy agency and dignity in expressing as well as experiencing their selves without fear, judgement, and shame.

Author: Ashmeet K. Bilkhu

यौन संबंध और समाज – अभिव्यक्ति की कल्पना 

मानव जीवन का एक अभिन्न अंग है, यौनिकता। यौनिकता केवल शारीरिक या भौतिक स्तर पर ही सीमित न होकर हमारी सोच, अभिव्यक्ति और व्यवहार नीतियों को भी संबोधित करती है। क्योंकि मनुष्य केवल सामाजिक, राजनितिक, आर्थिक आदि न होकर लैगनिक भी होता है, इसलिए यौन संबंध में रुचि हमें लुभाती है और आकर्षित करती है। हमारे भीतर…
a picture of scales, one tilted downwards, the other tilted upwards

पुस्र्षत्व का बोध – सूची की नज़र से

अस्वस्थ्य मर्दानगी या विषाक्त पुरुषत्व का हिंसक होने के लिए ज़रूरी नहीं है कि जाहिर तौर पर मौखिक या शररिक रूप से घातक हो। इसके लक्षण रोज़मर्रा के वार्तालाप या अंतरंग बातचीत से भी सामने आते है।
mughal era painting of a man and woman in an intimate pose

समाज में यौनिकता और आत्मीयता की मीमांसा

यौनिकता पर संलाप या डिस्कोर्स नया नहीं है। समाज में हर प्रकार के विशेषज्ञों ने इस पर चर्चा की है। विज्ञान से लेकर अध्यात्म तक यौनिकता के प्रसंग विशेषज्ञों को रिझाते रहे हैं।
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