A digital magazine on sexuality, based in the Global South: We are working towards cultivating safe, inclusive, and self-affirming spaces in which all individuals can express themselves without fear, judgement or shame

Aruvi

एक बच्ची (जिसकी पीठ और बाल दिख रखे है) पानी के झरने की और देख रही है, झरने क आस-पास हरियाली और पहाड़ है। बच्ची के बाल कंधे तक है और उसने हलके भूरे रंग की कमीज़ पहनी है

अरुवि: घर और ‘मासूमियत’ पर सवालात

समय के साथ-साथ अब मैं जान चुकी हूँ कि उनके इस उलाहने में ‘घर’ का मतलब सिर्फ वो जगह नहीं है जहां मेरे माता-पिता रहते हैं, बल्कि इसका मतलब उन सभी व्यवहारों और मान्यताओं से है जिनकी अक्सर माता-पिता अपने बच्चों से उम्मीद करते हैं।
एक बच्ची (जिसकी पीठ और बाल दिख रखे है) पानी के झरने की और देख रही है, झरने क आस-पास हरियाली और पहाड़ है। बच्ची के बाल कंधे तक है और उसने हलके भूरे रंग की कमीज़ पहनी है

Aruvi: Questioning home and ‘innocence’

Over time, I realised that ‘home’ meant not just the physical and emotional space occupied by my parents, but also a set of practices or strictures, mostly dictated by parents, related to gender roles, religion, sex, marriage, friendships and ‘appropriate’ behaviour.
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