A digital magazine on sexuality, based in the Global South: We are working towards cultivating safe, inclusive, and self-affirming spaces in which all individuals can express themselves without fear, judgement or shame
Poem, Raat Naa Jane Dabe Paao Kaha Chalti Hain: picture of the moon and its shadow falling on the sea
CategoriesSex and Sexualityहिन्दी

रात दबे पाँव न जाने कहाँ भागती रहती है

लेखक की ओर से: इस कविता में अलंकार का प्रयोग करते हुए महिलाओं के भय का चित्रण करने की कोशिश है, वो भय जो कुछ जेंडर (विशेषकर महिलाओं) को प्रभावित करता है और जिस से उनके दैहिक स्वच्छंदता के तमाम रास्ते दुरूह हो जाते हैं; मेरी यह कविता उन सभी महिलाओं को समर्पित है जिनके शरीर, इच्छा और आनंद को इस समाज ने अनदेखी बेड़ियों में बाँध रखा है।

रात दबे पाँव न जाने कहाँ भागती रहती है

किसी से कुछ कहती नहीं,जागती रहती है

किसी मोड़ पे किसी परछाई की तलाश में

आँखें मींच के हर शख्स को ताकती रहती है

उजाले की बिल्कुल भी कोई ख्वाहिश नहीं

बस हर घड़ी पूनम का चाँद माँगती रहती है

नींद की गलियों में क्यों कर छुप-छुपा कर

ख़्वाबों के मुलायम धागे बाँधती रहती है

खुल गई हैं सड़कों पर रिश्तों की कई गिरहें

चुपचाप वो खामोशी के बटन टाँकती रहती  है

चित्र: Pixabay

Article written by:

लेखक परिचय सलिल सरोज जन्म: 3 मार्च,1987,बेगूसराय जिले के नौलागढ़ गाँव में(बिहार)। शिक्षा: आरंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, तिलैया, कोडरमा,झारखंड से। जी.डी. कॉलेज,बेगूसराय, बिहार (इग्नू)से अंग्रेजी में बी.ए(2007),जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , नई दिल्ली से रूसी भाषा में बी.ए(2011), जीजस एन्ड मेरी कॉलेज,चाणक्यपुरी(इग्नू)से समाजशास्त्र में एम.ए(2015)। प्रयास: Remember Complete Dictionary का सह-अनुवादन,Splendid World Infermatica Study का सह-सम्पादन, स्थानीय पत्रिका"कोशिश" का संपादन एवं प्रकाशन, "मित्र-मधुर"पत्रिका में कविताओं का चुनाव। सम्प्रति: सामाजिक मुद्दों पर स्वतंत्र विचार एवं ज्वलन्त विषयों पर पैनी नज़र। सोशल मीडिया पर साहित्यिक धरोहर को जीवित रखने की अनवरत कोशिश।पंजाब केसरी ई अखबार ,वेब दुनिया ई अखबार, नवभारत टाइम्स ब्लॉग्स, दैनिक भास्कर ब्लॉग्स,दैनिक जागरण ब्लॉग्स, जय विजय पत्रिका, हिंदुस्तान पटनानामा,सरिता पत्रिका,अमर उजाला काव्य डेस्क समेत 30 से अधिक पत्रिकाओं व अखबारों में मेरी रचनाओं का निरंतर प्रकाशन। भोपाल स्थित आरुषि फॉउंडेशन के द्वारा अखिल भारतीय काव्य लेखन में गुलज़ार द्वारा चयनित प्रथम 20 में स्थान। कार्यालय की वार्षिक हिंदी पत्रिका में रचनाएँ प्रकाशित। ई-मेल:salilmumtaz@gmail.com

x