Imran Khan
मर्दानगी पर पुनर्विचार – प्रभुत्व से नहीं, साझेदारी से बनता है मर्द
पितृसत्ता ने मर्दानगी को विषमलैंगिकता और यौनिक वर्चस्व से जोड़ा है, जिससे पुरुषों पर ‘सच्चा मर्द’ बनने का दबाव बढ़ता है। यह न केवल समलैंगिक और द्विलैंगिक पुरुषों को हाशिए पर डालता है, बल्कि विषमलैंगिक पुरुषों के लिए भी यौनिक अभिव्यक्ति को सीमित करता है।
By Imran Khan