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सेवा में : भारत सरकार, सभी राजनैतिक दल और सभी नागरिक
हमें यह बात विशेष रूप से ध्यान में रखनी होगी कि भारत, बाल अधिकारों पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का हस्ताक्षरी है, जिसमें अन्य बातों के अलावा यह भी
कहा गया है कि प्रत्येक बच्चे को उच्च स्तर के स्वास्थ्य का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, प्रतिभागिता का अधिकार तथा यौन-शोषण एवं उत्पीड़न सहित सभी प्रकार के
शोषण एवं उत्पीड़न से सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है।
स्वास्थ्य में यौन-स्वास्थ्य भी शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के अनुसार, किसी व्यक्ति का समग्र स्वास्थ्य केवल बीमारी अथवा कमज+ोरी का न
होना ही नहीं है बल्कि उस व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सुखी-समृद्ध होना है। इसमें यौन और प्रजनन स्वास्थ्य भी शामिल हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं?
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- के अनुसार, भारत में अभी भी ४४.५ प्रतिशत महिलाओं की शादी १८ साल की उम्र तक कर दी जाती है (शहरी क्षेत्रों में
२८.१ प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ५२.५ प्रतिशत)।
- १५ से १९ साल की आयु वाली जिन महिलाओं का साक्षात्कार किया गया उनमें से १६ प्रतिशत महिलाएं, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के समय तक या तो मां
बन चुकीं थीं या गर्भवती थीं।
- एचआईवी सेंटिनेल सर्वेलेन्स और एचआईवी अनुमानों के अनुसार, वर्ष २००६ में एचआईवी/एड्स ग्रस्त २५ लाख लोगों में से ३.८ प्रतिशत बच्चे (१५ वर्ष से कम आयु
के) हैं, विगत ५ वर्षों में जिनका प्रतिशत बढ़ा है।
- वर्ष २००७ में भारत के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा करवाए गए एक अध्ययन के अनुसार, कुल १२,४४७ बच्चों में से ५३.२२ प्रतिशत ने अपने को एक या अधिक
प्रकार के यौन उत्पीड़न का शिकार होना बताया जिसमें गंभीर तथा अन्य प्रकार के शोषण की मामले शामिल थीं। (इनमें से ५२.९४ प्रतिशत लड़के तथा ४७.०६ प्रतिशत लड़कियां
थीं।)
इस प्रकार के आंकड़ों से यह ज+रूरी हो गया है कि युवाओं के यौन व्यवहारों को समझा जाए एवं उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए तथा उन्हें ऐसा माहौल उपलब्ध कराया
जाए कि वे यौन संबंधी कठिनाइयों के बारे में खुल कर बात कर सकें। सबसे पहले यह ज+रूरी है कि युवाओं को अपने जीवन से संम्बधित हर बड़े निर्णय लेने के अधिकार
दिए जाएं।
तारशी की टेलिफोन हेल्पलाइन के अनुभव
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१४ फरवरी, १९९६ से लेकर १० अक्तूबर, २००७ के बीच तारशी की हेल्पलाइन पर आई ४३,८८८ टेलिफोन कॉलों का विश्लेषण किया गया, जिससे पता चला कि इनमें से ४२.६
प्रतिशत कॉलें १५ से २४ साल की आयु वाले व्यक्तियों की हैं।
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फोन करने वाले युवा, यौन व्यवहारों के बारे में जानने को उत्सुक होते हैं और प्रायः उन्हें, उनके अपने शरीर, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी विषयों तथा
संबंधों के बारे में सही और विश्वसनीय जानकारी नहीं मिल पाती।
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युवाओं सहित सभी उम्र के लोगों द्वारा फोन कर, यह पूछना कि क्या चुंबन से गर्भधारण हो सकता
है? यह बताता है कि उन्हें यौन सबंधी आधारभूत तथा
महत्वपूर्ण जानकारी भी नहीं है।
हम आह्वान करते हैं इस विषय से सरोकार रखने वाले उन सभी व्यक्तियों तथा संगठनों का, कि वे हमारे साथ मिलकर अपने राजनेताओं से अनुरोध करें कि वे १९९२ में बाल
अधिकारों विषय पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र संघ के सम्मेलन में किए गए अपने वादों पर अमल करने हेतु कार्रवाई करें।
हम अनुरोध करते हैं अपने राजनेताओं, भारत सरकार और विशेषकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय से, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) और सभी संबंधित प्राधिकारियों
से, कि वे युवाओं को सूचना का अधिकार, यथासंभावित उच्च स्तरीय स्वास्थ्य और इसके फलस्वरूप उनके जीवन का अधिकार सुनिश्चित करें।
हम मांग करते हैं सभी बच्चों और नवयुवाओं के लिए यौन शिक्षा पर एईपी (किशोर शिक्षा कार्यक्रम) के पाठ्यक्रम में तुरंत संशोधन किए जाने का, जिससे कि वह बच्चे
के सर्वोच्च हित'' में हो, न कि नैतिकता, संस्कृति और परंपरा के संकीर्ण बंधनों से जकड़ा हो। यह जेंडर आधारित, आयु के अनुसार तथा नैतिक मूल्यों के बारे में
गलत धारणाओं से मुक्त, व्यापक यौन शिक्षा दिए जाने की दिशा में पहला कदम होगा, जो युवाओं को भयमुक्त, रोगमुक्त एवं हिंसामुक्त जीवन जीने तथा शारीरिक- मानसिक
स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुख-समृद्धि हेतु अनिवार्य है।
हम मांग करते हैं कि कार्यक्रम निर्माण प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता लाई जाए तथा बच्चों के जीवन तथा भविष्य पर सीधे असर डालने वाली नीतियों और कार्यक्रमों
में बच्चों की प्रतिभागिता संबंधी अधिकारों के अनुसार, कार्यक्रम निमार्ण प्रक्रिया में युवाओं को शामिल किया जाए।
हम अनुरोध करते हैं कि सरकार, बच्चों और नवयुवाओं के लिए व्यापक यौन शिक्षा पाठ्यक्रम निर्माण हेतु एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया आरंभ करने की दिशा में गंभीर
प्रतिबद्धता दिखाए, जिसमें विभिन्न विषय-विशेषज्ञ, माता-पिता, युवा तथा शिक्षाशास्त्री शामिल हों और प्रशिक्षु अध्यापकों तथा चिकित्सकों एवं नर्सों सहित सभी
स्वास्थ्य कर्मिर्यों के पाठ्यक्रम में यौन-शिक्षा संबंधी प्रशिक्षण को शामिल किया जाए।
भवदीय,
१४ फरवरी, २००९
सहयोगी निवेदक संगठन
तार्शी; कैरेट व जीएफएटीएम राउण्ड-७ परियोजना; टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज; सैन्टर फॉर डेवलपमैन्ट इनीशियटिव्स; क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वैल्लोर;
क्रिया; इंटरनेशनल सर्विसेज+ एसोशियशन; महिला सर्वांगीण उत्कर्ष मण्डल; निरंतर; प्रयास; राही फाउण्डेशन; सहयोग; सामा रिसोर्स ग्रुप फॉर वीमैन एण्ड हैल्थ;
संपदा ग्रामीण महिला संस्था; तुलिर - सैन्टर फॉर दी प्रीवैन्शन एण्ड हीलिंग ऑफ चाइल्ड सैक्सुऍल अब्यूज; वेश्या अन्याय मुक्ति परिषद; यूथ फॉर चेन्ज, उत्तर
प्रदेश; वाईआरजी केयर |
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