A digital magazine on sexuality in the Global South

1. एसेक्शुअल

यौनिक पहचान को हम अक्सर यौन आकर्षण के आधार पर परिभाषित करते हैं। यदि इस लेंस से समझें तो एसेक्शुअल व्यक्ति, सामान्यतः किसी भी अन्य व्यक्ति की ओर यौनिक आकर्षण नहीं महसूस करते हैं। हो सकता है कुछ एसेक्शुअल व्यक्ति कभी भी यौन आकर्षण ना महसूस करें, हो सकता है कुछ कभी-कभी करें या ये भी हो सकता है कि कुछ किसी ख़ास परिस्थिति में ही या किसी ख़ास व्यक्ति के प्रति ही यौन आकर्षण महसूस करें; एक तरह से एसेक्शुअलिटी का भी अपना एक स्पेक्ट्रम या विस्तार है। यौन आकर्षण न होने का मतलब ये नहीं कि एसेक्शुअल व्यक्ति आकर्षण ही नहीं महसूस करते; किसी भी अन्य व्यक्ति की तरह वे रोमांटिक आकर्षण महसूस कर सकते हैं और गहरे भावनात्मक रिश्ते बना सकते हैं। निसंदेह, उनकी भी भावनात्मक ज़रूरतें होती हैं और अन्य दूसरे लोगों की तरह वे इनको कैसे पूरा करते हैं यह उनका व्यक्तिगत मामला है। वे डेट पर जा सकते हैं, लम्बे अरसे तक भावनात्मक रिश्ते में रह सकते हैं या अकेले रहने का निश्चय भी कर सकते हैं।

2. यौनिकता (सेक्शुअलिटी)

यौनिकता मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन का मुख्य पहलु है जिसमें लिंग, जेंडर पहचान व भूमिका, यौन अभिविन्यास, कमुकता, सुख, घनिष्ठता व प्रजनन सम्मिलित है। यौनिकता विचार, परिकल्पना, इच्छा, विश्वास, अभिवृत्ति, मूल्य, व्यवहार, अनुभव, सम्बन्ध में अनुभव व अभिव्यक्त की जाती है। यद्यपि यौनिकता के अंतर्गत उपरोक्त सभी पहलु आते हैं परन्तु सभी एक साथ अनुभव व अभिव्यक्त नहीं किए जाते। यौनिकता पर जैविक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, नैतिक, कानूनी, ऐतिहासिक, धार्मिक व आध्यात्मिक कारकों का प्रभाव होता है।

डब्लूएचओ की कार्यकारी परिभाषा, २००६  

3. व्यापक यौनिकता शिक्षा (कॉम्प्रीहैन्सिव सेक्शुएलिटी ऐजुकेशन – सीएसई)

व्यापक यौनिकता शिक्षा युवाओं को वह जानकारी, कौशल, दृष्टिकोण और मूल्य उपलब्ध कराती है जिससे कि वे अपनी यौनिकता निर्धारित करके उसका शारीरिक व भावात्मक आनंद ले सकें, व्यक्तिगत रूप से व रिश्तों में। यह यौनिकता के संपूर्ण रूप को भावनात्मक और सामाजिक विकास के संदर्भ में देखती है। यह मानती है कि केवल जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं है। युवाओं को आवश्यक जीवन कौशल विकसित करने के लिए और सकारात्मक दृष्टिकोण और मूल्य विकसित करने के अवसर दिए जाने चाहिए।

व्यापक यौनिकता शिक्षा, यौनिकता के दोनों, शारीरिक एवं जैविक पहलुओं और भावनात्मक एवं सामाजिक पहलुओं  के मुद्दों को शामिल करती है। यह इस बात को समझती है और मानती है कि यौनिकता सभी के जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है और यह केवल बीमारी या गर्भधारण रोकने तक सीमित नहीं है। सीएसई कार्यक्रमों को लक्षित समूहों की उम्र और विकास के चरणों के अनुसार अपनाया जाना चाहिए।

इंटरनैशनल प्लैन्ड फेडरेशन फ्रेमवर्क फॉर कॉम्प्रीहैन्सिव सेक्शुएलिटी ऐजुकेशन, जनवरी २०१०

व्यापक यौनिकता शिक्षा (सीएसई) यौनिकता के संज्ञानात्मक, भावनात्मक, शारीरिक और सामाजिक पहलुओं के बारे में सीखने और सिखाने की एक पाठ्यक्रम-आधारित प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को ज्ञान, कौशल, व्यवहार और मूल्यों से लैस करना है जो उन्हें सशक्त बनाएगा – उनके स्वास्थ्य, खुशहाली और गरिमा के एहसास के लिए; सम्मानजनक सामाजिक और यौनिक संबंधों के विकास के लिए; उनके चुनाव उनकी अपनी खुशहाली और अन्य लोगों को कैसे प्रभावित करते हैं, इस विचारशीलता के लिए; और अपने जीवन भर में अपने अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।

रिवाइज्ड एडिशन ऑफ़ द इंटरनेशनल टेक्निकल गाइडेंस ऑन सेक्शुअलिटी एजुकेशन, यूनेस्को, २०१८

4. बीडीसएम

बीडीसएम् एक संक्षेपाक्षर है जिसमें आपसी सहमति रखने वाले व्यस्क लोगों के बीच यौन आनंद प्राप्त करने के निम्न तरीके शामिल हो सकते हैं, हालाँकि इसमें हमेशा यौन सम्बन्ध का शामिल होना ज़रूरी नहीं है।

बाँडेज एंड डिसिप्लिन – बांधे जाना अनुशासन में रखना

डोमिनांस एंड सबमिशन – प्रभावी बनना और/या हार मानना

सेडिस्म एंड मैसकिज़म – स्वपीड़न एवं परपीड़न

इसे सेक्स करने का एक तरीका, एक तरह का जीवन जीने का तरीका, एक रुझान या एक संस्कृति भी समझा जा सकता है। लेकिन बहुत से लोग इसे अपनी जीवन शैली ना मानते हुए भी सेक्स के दौरान इन बीडीएसएम् तरीकों का प्रयोग करते हैं। इस तरह से सेक्स करने के तरीके को किंक, फेटिश, लेदर या एस एंड एम् जैसे कई दुसरे नामों से भी जाना जाता है।

बीडीएसएम् तरीकों का इस्तेमाल करने वाले लोग आपस में सम्बन्ध बनाते समय, जिसे वे ‘प्ले या खेल’ कहते हैं, कई तरह के ‘सीन’ करते हैं जिनमे उनकी अलग-अलग भूमिकाएँ होती हैं। वे बीडीएसएम् करते हुए प्रभावी, स्वामी, स्वामिनी, या उत्पीड़क (डोमिनेंट, टॉप्स, मास्टर्स, मिस्ट्रेस या सैडिस्ट) की भूमिका निभा सकते हैं। कम सक्रिय भूमिका निभाने वाले व्यक्ति स्वयं की पहचान अधीन, गुलाम या स्वपीड़क (स्बमिस्सिव, सब, बॉटम्स, मसोचिस्ट्स अथवा स्लेव) के रूप में कर सकते हैं। कुछ लोग प्ले के दौरान अपनी इन भूमिकाओं की अदला-बदली भी करते हैं और स्वयं को स्विच कहना पसंद करते हैं।  

सोसाइटी फॉर साइकोथेरपी से रूपांतरित एवं अनुवादित

 

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