A digital magazine on sexuality in the Global South

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two women walking down a street

साक्षात्कार: शिल्पा फडके

‘आप मटरगश्ती (लॉयटर) क्यों करना चाहेंगे?’ नारीवादी शोधकर्ता, अभिभावक, शिक्षक और सक्रियतावादी डॉ॰ शिल्पा फडके से पूछने के लिए एक बढ़िया सवाल है।
By: Amateur Pic, Courtesy: PublicDomainPictures.net

बेटे का पत्र, पिता के नाम

आज वैश्विक और स्थानीय रूप से हम जहाँ भी हैं, मैं दिल से आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपने मुझे हमेशा ही मजबूत और निर्भीक रहना सिखाया है।
silhouette of a woman standing alone in a valley

‘हामी भरने’ या ‘मना करने’ का मेरा अधिकार

मनुष्यों के बीच के किसी भी तरह के आपसी सम्बन्धों में सहमति का होना, इन सम्बन्धों की मज़बूत नींव की तरह होना चाहिए। हमारे समाज में हम इस ‘सहमति’ देने या ‘ना’ कह पाने के अधिकार पर प्रतिक्रिया के रूप में नयी तरह की हिंसा को देख पा रहे हैं। अधिकारों को प्रयोग करने की इस प्रक्रिया को केवल किसी व्यक्ति द्वारा अपने अधिकारों के प्रयोग के रूप में न देखकर इसे सभी के लिए सामूहिक रूप से किए जा रहे अधिकारों के प्रयोग के रूप में देखा और समझा जाना चाहिए।
mughal era painting of a man and woman in an intimate pose

समाज में यौनिकता और आत्मीयता की मीमांसा

यौनिकता पर संलाप या डिस्कोर्स नया नहीं है। समाज में हर प्रकार के विशेषज्ञों ने इस पर चर्चा की है। विज्ञान से लेकर अध्यात्म तक यौनिकता के प्रसंग विशेषज्ञों को रिझाते रहे हैं।
a silhouette of a person standing with an umbrella

यादों के ताने बाने उलझाती सुलझाती मैं

ख्वाबों को बुनान और उसके साथ खेलना – एक अलग ही अहसास है। तुम राजा, तुम रंक। तुम लेखक तुम निर्देशक। तुम्हारा बस चलता है। हम सब के अंदर अलग ख्वाब भरे हुए हैं।
Malini Chib

सेक्सलेस इन द सिटी (जिसमें मेरी कोई गलती भी नहीं)

सेक्स या भावनात्मक जुड़ाव के लिए दोनों तरफ़ से जुड़ाव होना ज़रूरी है। विकलांगता के साथ जी रहे व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से थोड़ा ज़्यादा देना होगा जिससे कि रिश्ता चल सके।
a bunch of women stand defiantly

हँसे या न हँसे?

"अगर आप उसपर हँस सकते हैं तो सब कुछ मज़ाकिया है।" - लुईस कैरोल लुईस कैरोल को अधिकार-आधारित परिप्रेक्ष्य वाला माना जा सकता है क्योंकि वह हर किसी की हँसने की ताकत (एजेंसी) की पुष्टि करते हैं। लेकिन, हर किसी को हर बात मज़ाकिया नहीं लगती है, और ये हमें मानहानि के दावों की बढ़ती…

एक लंबी सनसनाहट

एक अलग जेंडर के शरीर के लिए मेरी इच्छा निरंतर और बेदर्द नहीं थी। ये तेज लहर सी होती और हमेशा मुझे उस शरीर के साथ काफ़ी संतुष्ट छोड़ जाती जो मेरे पास था। बृहन्नला का अवतार उस प्रकार की अस्थायी और पलटने योग्य संभावना के लिए एक संदर्भ बिंदु या आदर्श रूप बन गया।
A still from the film Rangeela a girl in a white dress with floral patterns and a hat dances with one leg up
A still from the film Rangeela

वो ‘फिल्मी’ शरीर – सार्वजनिक स्थानों में नृत्य और आनंद को समझना

इस तरह से नाचना न केवल सार्वजनिक स्थानों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करने का तरीका हो सकता है बल्कि यह अपने निजी शरीर में आनंद पाने का उपाए भी है – एक ऐसा आनंद जिसे आजतक केवल काम करते रहने में ही आनंदित होने तक सिमित कर दिया गया था।
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