A digital magazine on sexuality in the Global South

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picture of a group of young girls posing together, in rural India

वर्ग, जाति और विकल्प

हमें इस तरह से ढाला गया है कि तथाकथित 'विकल्प' जो हमारे संबंधों को परिभाषित करते हैं, वे भी हमारे लिए हुए विकल्प नहीं बल्कि समाज द्वारा सृजित हैं। हालाँकि, जैसा कि हमने देखा है, इन सभी चुनौतियों के बावजूद, महिलाएँ, जब वे खुद को व्यक्तियों के रूप में महत्वपूर्ण मानने लगती हैं, तो वे अपने परिवेश और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करने की रणनीति तैयार करती हैं।

जब सेक्स के साथ जुड़े कलंक के कारण महिलाओं को कामकाजी होने का दर्जा नहीं मिलता 

वर्किंग वुमन या ‘कामकाजी महिला’ शब्द सुनने पर, सबसे पहले हमारे मन में क्या विचार आता है? यही न कि महिला कोई प्रोफेसर हो सकती हैं या कोई पुलिस अधिकारी, स्कूल टीचर, डॉक्टर, सिलाई करने वाली, वकील, वैज्ञानिक हो सकती हैं या हो सकता है घर-काम करने वाली हों। क्या कामकाजी महिलाओं को परिभाषित करते…

गाँव से शहर – ‘नौकरानियाँ’ (हाउसमेड) और उनकी यौन इच्छाएँ

अधिकांश पूर्णकालिक (और यहाँ तक कि अंशकालिक लोगों के मामले में भी) घरेलू काम के लिए रखी महिलाएँ जो पैसे कमाती हैं वह उनके काम की तुलना में न के बराबर है, और जो फायदे उन्हें दिए जाते हैं (छुट्टियाँ, स्वास्थ्य देखभाल, पेंशन) वो काम पर रखने वाले की उदारता और अधिकतर उनकी मर्ज़ी पर निर्भर है।

अजब तमाशा (फ्रीक शो) – प्रदर्शनी के लिए सजे मानव शरीरों की पड़ताल

और एक बार फिर यहाँ कार्निवाल को सफलता मिलती है। सबसे पहले ही एपिसोड में, 'सामान्य' नायक बेन, जो टेंट लगा कर अपनी मज़दूरी कमाते हैं, पहली बार छिपकली मानव गेको से टकराते हैं। गेको को त्वचा रोग है जिसके कारण पूरे शरीर में उनकी त्वचा पर मोटी, हीरे के आकार की, फीकी पपड़ी सी बन जाती है। इसके अलावा, उनकी कड़े बालों की पूँछ है।
An abstract illustration of a person with a green-coloured head and hair painted in yellow and magenta. They are also wearing glasses

एक (अ)यौनिक अस्तित्व

मैं अपनी यौनिकता को अपनी पहचान का अलग हिस्सा नहीं मानती। मैं अलग व्यक्ति नहीं हूँ क्योंकि मैं एसेक्शुअल हूँ। यह सिर्फ़ आकार देता है कि मैं कौन हूँ, वैसे ही जैसे मेरी राजनीतिक राय या धार्मिक विश्वास मेरे दुनिया के प्रति नज़रिए को आकार देते हैं।
CC

एक पुराना प्रश्न जो आज भी महत्वपूर्ण है

निष्कर्ष के रूप में - आनंद और जोखिम के बारे में विचार उन तरीकों के लिए महत्वपूर्ण हैं जिनमें जेंडर और यौनिकता सार्वजनिक और निजी स्थान के बारे में विचारों के साथ अन्तःक्रिया करते हैं। हालाँकि इनमें से कुछ प्रश्न पुराने लगते हैं, सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिस्पर्धा के दावों पर सार्वजनिक बहस में नए सिरे से जारी रहते हैं। सार्वजनिक और निजी स्थानों के बारे में विचार उन तरीकों को भी फटकारते हैं जिनमें जाति और वर्ग सम्मान के बारे में विचारों को आकार देते हैं, इस प्रकार कुछ स्थानों को 'सुरक्षित' और दूसरों को 'जोखिम भरे' के रूप में चिह्नित करते हैं।
the inside of a bus

गतिशीलता को दबा देने के औज़ार

बाद में जब वह आदमी अपने गंतव्य स्थान पर उतर गया, तो मैंने उस दंपति से अपने असभ्य होने के लिए माफ़ी मांगी। मैं अभी भी दयनीय और असहाय महसूस करती हूँ कि मैंने उस आदमी के उत्पीड़न के लिए और अधिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं व्यक्त की और अपने असली स्वभाव को दबाकर क्यों रखा।

मैं कहाँ जाऊँ?

मैं एक नॉन-बाइनरी व्यक्ति (जो जेंडर को महिला-पुरुष युग्मक तक सीमित नहीं मानते) हूँ जिसका जन्म के समय जेंडर निर्धारण लड़की के रूप में हुआ। इस समय मेरी रिहाइश मुंबई में है। मेरी वेश-भूषा और पहनावा ऐसा जिसे आप पुरुषों का पहनावा कह सकते हैं। आप मुझे कमीज़, टी-शर्ट, पैंट, निक्कर या शॉर्ट्स और ‘आदमियों’…
two women walking down a street

साक्षात्कार: शिल्पा फडके

‘आप मटरगश्ती (लॉयटर) क्यों करना चाहेंगे?’ नारीवादी शोधकर्ता, अभिभावक, शिक्षक और सक्रियतावादी डॉ॰ शिल्पा फडके से पूछने के लिए एक बढ़िया सवाल है।
By: Amateur Pic, Courtesy: PublicDomainPictures.net

बेटे का पत्र, पिता के नाम

आज वैश्विक और स्थानीय रूप से हम जहाँ भी हैं, मैं दिल से आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपने मुझे हमेशा ही मजबूत और निर्भीक रहना सिखाया है।

इंटरव्यू – रत्नाबोली रे 

रत्नाबोली रे - रत्नाबोली मानसिक स्वास्थ्य विषय पर काम करने वाली ऐक्टिविस्ट, एक प्रशिक्षित मनोविज्ञानी, और अंजलि मानसिक स्वास्थ्य अधिकार संस्था की संस्थापिका हैं। अंजलि मानसिक स्वास्थ्य अधिकार संस्था सरकार के साथ मिलकर मानसिक रोग और मनो:सामाजिक विकलांगताओं के साथ रह रहे लोगों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए कार्य करती है। रत्नाबोली कहती हैं…
silhouette of a woman standing alone in a valley

‘हामी भरने’ या ‘मना करने’ का मेरा अधिकार

मनुष्यों के बीच के किसी भी तरह के आपसी सम्बन्धों में सहमति का होना, इन सम्बन्धों की मज़बूत नींव की तरह होना चाहिए। हमारे समाज में हम इस ‘सहमति’ देने या ‘ना’ कह पाने के अधिकार पर प्रतिक्रिया के रूप में नयी तरह की हिंसा को देख पा रहे हैं। अधिकारों को प्रयोग करने की इस प्रक्रिया को केवल किसी व्यक्ति द्वारा अपने अधिकारों के प्रयोग के रूप में न देखकर इसे सभी के लिए सामूहिक रूप से किए जा रहे अधिकारों के प्रयोग के रूप में देखा और समझा जाना चाहिए।
mughal era painting of a man and woman in an intimate pose

समाज में यौनिकता और आत्मीयता की मीमांसा

यौनिकता पर संलाप या डिस्कोर्स नया नहीं है। समाज में हर प्रकार के विशेषज्ञों ने इस पर चर्चा की है। विज्ञान से लेकर अध्यात्म तक यौनिकता के प्रसंग विशेषज्ञों को रिझाते रहे हैं।
a silhouette of a person standing with an umbrella

यादों के ताने बाने उलझाती सुलझाती मैं

ख्वाबों को बुनान और उसके साथ खेलना – एक अलग ही अहसास है। तुम राजा, तुम रंक। तुम लेखक तुम निर्देशक। तुम्हारा बस चलता है। हम सब के अंदर अलग ख्वाब भरे हुए हैं।
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