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नकली या फ़ेक पहचान के साथ ऑनलाइन होना – युवा महिलाओं द्वारा एक से अधिक प्रोफ़ाइल बना, सोशलसोशल मीडिया पर आत्म-अभिव्यक्ति करना

अपनी एम. फिल. की थीसिस के लिए मैंने “सेल्फ़ी लेने और सोशल मीडिया की ओर युवा महिलाओं के आकर्षण” के विषय को चुना था। मेरे ऐसा करने के पीछे कई कारण थे। सबसे महत्वपूर्ण कारण यह था कि मैं युवा महिलाओं के मन में टेक्नालजी, आत्म-अभिव्यक्ति तथा शरीर के प्रति लगाव को समझना और डॉकयुमेंट करने की इच्छुक थी। उस संदर्भ में, जहाँ प्रचलित मीडिया पर बताई जा रही बातों, और MTV Webbed[1] तथा क्राइम पैट्रोल[2] जैसे मशहूर टेलिविजन कार्यक्रमों के दिखाए जाने के चलते इंटरनेट की डिजिटल ऑनलाइन दुनिया में यौन शिकारियों की भरमार देखने को मिलती है, यह विषय चुनना और भी आवशयक हो गया था। इन टेलिविजन कार्यक्रमों में जो थीम समान रूप से देखने को मिलती है वह है पोर्नोग्राफी का सहारा लेकर बदले चुकाना। इसमें दोस्ती के दिनों में पीड़ित की सहमति से ली गयी उनकी तस्वीरों में से उनके चेहरे को दूसरी नग्न तस्वीरों पर प्रत्यारोपित कर दुनिया को दिखाने के लिए चारो ओर फैला दिया जाता है। इन कहानियों की नायिका या पीड़िता आमतौर पर एक युवा महिला होती है और उसे परेशान करने वाला यौन अपराधी अधेड़ उम्र का कोई आदमी होता है जिसे पीड़िता नहीं जानती। इस तरह के कार्यक्रमों के द्वारा मीडिया, इंटरनेट या ऑनलाइन तरीकों का प्रयोग करने वाली नवयुवा महिलाओं के बारे “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी” या “सचेत रहो, सुरक्षित रहो” जैसे संदेश देता प्रतीत होता है। मीडिया के इन संदेशों की नायिका, यह युवा महिला हमेशा ‘निरीह’, ‘भोली’, ‘संवेदनशील’ होती है जिसे सुरक्षा दिए जाने की ज़रूरत है। ऐसे स्थिति में हम टेक्नालजी के प्रयोग में महिलाओं के खुद निर्णय लेने, खासकर ऑनलाइन माध्यमों पर यौन इच्छाओं की अभिव्यक्ति करने के फैसलों को किस तरह समझ और जान सकते हैं? 

थीसिस लिखे जाने के दौरान फील्डवर्क करने की प्रक्रिया में मैंने बीस युवा महिलाओं से बातचीत कर, उनके सेलफ़ी खींचने, सोशल मीडिया का प्रयोग करने और डिजिटल टेक्नालजी के प्रयोग के बारे में जानना चाहा। सोशल मीडिया के बारे में इन महिलाओं के साथ हुई बातचीत में अनेक महिलाओं ने ‘झूठी या छदम’ ऑनलाइन पहचान अथवा ‘फ़ेक प्रोफ़ाइल’ और लोगों द्वारा एक से ज़्यादा प्रोफ़ाइल बनाए जाने के प्रति अपना डर जताया। उन्होने बताया कि सोशल मीडिया पर लोगों के झूठी पहचान बनाने से पता चलता है कि पहचान बनाने वाला व्यक्ति कुछ न कुछ गलत करने या धोखा देने की मंशा रखता है। ‘फ़ेक प्रोफ़ाइल’ का विवरण देते हुए महिलाओं ने बताया कि ऐसा करने वाले व्यक्ति प्रोफ़ाइल में अपना नाम पता आदि गलत बताते हैं, और अपनी पहचान छुपा कर रखने के लिए अपनी फोटो अपलोड नहीं करते। लेकिन ऑनलाइन सोशल मीडिया पर युवा महिलाओं को यौन शिकारियों से इस तरह के जोखिम की बात उस समय और पेचीदा हो गयी जब मुझसे बात कर रही तीन महिलाओं ने मुझे विश्वास में लेकर बताया कि उन्होने भी अपने ‘फ़ेक प्रोफ़ाइल’ बना रखे थे। मैंने यहाँ विश्वास में लेकर बताने वाली बात इसलिए लिखी है क्योंकि उन तीनों ने ही मुझे बताया कि बहुत ही कम लोगों को उनके इस ‘फ़ेक प्रोफ़ाइल’ होने की जानकारी थी।          

ज़ारा[3] ने फ़ेसबुक पर अपनी एक ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल बनाई है, जिसमें उन्होंने अपना कोई दूसरा नाम और सरनेम बताया है और अपनी फोटो की जगह किसी मशहूर हस्ती की तस्वीर प्रोफ़ाइल पिक्चर में लगा दी है। ज़ारा कहती हैं कि उन्होंने अपने ‘वास्तविक’ फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल के अपने कुछ दोस्तों को भी इस फ़ेक प्रोफ़ाइल में अपने दोस्तों की तरह जोड़ दिया है, लेकिन फ़ेक प्रोफ़ाइल में शामिल दूसरे लोग या तो वे लोग हैं जिन्हे वो जानती हैं या उनके दोस्तों के दोस्त हैं जिन्हे वह और अच्छी तरह जानना चाहती हैं। जब मैंने ज़ारा से पूछा कि उन्होंने यह फ़ेक प्रोफ़ाइल क्यों तैयार की, तो इस पर उन्होंने बताया, 

कभी-कभी तो मैं कुछ लड़कों के साथ चैटिंग कर उन्हें बेहतर ढंग से जानना चाहती हूँ। कभी-कभी मैं लड़कों के साथ फ्लर्ट भी करना चाहती हूँ। लेकिन अगर मैं अपनी सही प्रोफ़ाइल से ऐसा करूँ, तो लोग मेरे बारे में बातें करना शुरू कर देंगे और मुझ पर चीप या चालू होने का लेबल लग जाएगा। हो सकता है कि मेरे भाई को भी इसकी भनक लग जाए, फिर तो मैं बड़ी मुसीबत में पड़ जाऊँगी। लेकिन अपने इस फ़ेक प्रोफ़ाइल की मदद से, मैं जो चाहे कर सकती हूँ। कभी-कभी तो मैं लड़कों से बातचीत के दौरान उनसे यह भी पूछ लेती हूँ कि वे ज़ारा के बारे में क्या सोचते हैं। ऐसे मुझे इन लड़कों के ज़ारा के अच्छे दोस्त होने की सच्चाई का पता तब चल जाता है जब वे मुझे, यानी मेरे फ़ेक प्रोफ़ाइल पर ज़ारा की तारीफ़ करते हैं। ऐसा कर मैं मज़े ले सकती हूँ। [ज़ारा, 19 वर्ष]  

ज़ारा ने यह भी बताया कि फ़ेक प्रोफ़ाइल तैयार कर, उसे बनाए रखना हमेशा आसान नहीं होता। वो जिन लड़कों से चैटिंग करती हैं, हो सकता है वे उन्हें अपनी सेलफ़ी भेजने के लिए कहें। यह सेलफ़ी उनके चेहरे की भी हो सकती है या शरीर की भी। ज़ारा कहती हैं कि लड़के ऐसा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि या तो उन्हें यह शक हो जाता है कि यह प्रोफ़ाइल फ़ेक है या फिर वे चेहरे अथवा शरीर की सेलफ़ी मांग कर चैटिंग में ज़्यादा नज़दीकियाँ बढ़ाना चाहते हैं। वह कहती हैं कि वो लड़कों के इस तरह सेलफ़ी मांगे जाने से बच जाती हैं क्योंकि वो यह जताती हैं कि सेलफ़ी देने की बात सुनकर उन्हें बुरा लगा है। वो बताती है कि ऐसा कहने पर लड़के मान जाते हैं क्योंकि लड़कियों के अपने बदन की नुमाइश करना सही नहीं समझा जाता और लड़की होने के नाते अपनी सेलफ़ी भेजने की बात पर उनका नाराज़ होना उन्हें जायज़ लगता है। ज़ारा कहती हैं कि वह यौन इच्छाओं की अभिव्यक्ति करने के खिलाफ नहीं हैं लेकिन उन्हें सावधानी इसलिए बरतनी पड़ती है क्योंकि उनकी माँ और भाई, जो पक्के मुस्लिम हैं, उनके इस तरह से यौनिकता की अभिव्यक्ति को कभी पसंद नहीं करेंगे। 

निहारिका ने मुझे बताया कि उन्हें अपना ‘फ़ेक प्रोफ़ाइल’ इसलिए बनाना पड़ा क्योंकि उन्होंने अपने ‘असली’ प्रोफ़ाइल में पहले ही अपने सभी भाई-बहनों और रिश्तेदारों को जोड़ रखा था। उन्होंने बताया कि उनका एक बॉयफ्रेंड है, और वो इस बॉयफ्रेंड के साथ अपने सम्बन्धों के बारे में अपने परिवार में किसी से नहीं कह सकतीं क्योंकि परिवार के लोग उस लड़के के गैर-ब्राह्मण होने के कारण कभी स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें रोज़ नए-नए अंदाज़ में सेलफ़ी खींचने का शौक है और उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ भी अनेक तस्वीरें खींच रखी हैं। अब चूंकि वो अपने खुद के प्रोफ़ाइल पर इन तस्वीरों को लोगों के साथ साझा नहीं कर सकतीं, इसलिए उन्होंने दूसरा एक ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल तैयार किया है जिस पर वह अपनी और अपने बॉयफ्रेंड की सभी तस्वीरें डाल देती हैं। इस दूसरे प्रोफ़ाइल में, जिसे वह अपना ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल कहती हैं, उन्होंने अपने स्कूल और कॉलेज के अधिकांश दोस्तों को तो जोड़ रखा है लेकिन सभी भाई-बहनों और रिश्तेदारों को इस पर से ब्लॉक कर रखा है। फिर भी निहारिका कहती हैं कि इस तरह दूसरा प्रोफ़ाइल बनाए रखना बहुत जोखिम भरा काम है और वह कभी भी पकड़ी जा सकती हैं। फिर भी वो अपना यह दूसरा ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल कभी खत्म इसलिए नहीं करेंगी क्योंकि इसके कारण उन्हें बहुत आज़ादी मिली है। 

ज्योत्सना ने विस्तार से यह तो नहीं बताया कि उन्होंने अपना एक और प्रोफ़ाइल क्यों बनाया था, सिर्फ़ इतना कहा कि इस दूसरे प्रोफ़ाइल से वह नए लोगों को अपने दोस्तों की सूची में शामिल कर पाती हैं और उनके बारे में ज़्यादा जान सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वो इस प्रोफ़ाइल का इस्तेमाल बहुत ज़्यादा नहीं करती और न ही उन्होंने अपने परिवार वालों और दोस्तों को इसके बारे में बताया है। 

सोशल मीडिया पर बनाए गए किसी एक प्रोफ़ाइल को ‘असली’ और दूसरे को ‘फ़ेक’ कहकर पुकारने से पहचान ज़ाहिर करने पर ही सवालिया निशान उठ खड़े होते हैं कि क्यों युवा महिलाएँ अपनी पहचान को अलग-अलग रूप में लोगों के सामने प्रकट करना चाहती हैं। ऊपर दिए गए तीन उदाहरणों से इन ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल को तैयार करने के पीछे के कारणों के बारे में पता चलता है। इन महिलाओं द्वारा दिए गए विवरण अनुसार ये तथाकथित ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल, उन बन्दिशों या आवश्यकताओं के चलते बनाए गए थे जो किसी भी प्रोफ़ाइल को तैयार करते समय पूरी करनी होती हैं। इन युवा महिलाओं को प्रोफ़ाइल बनाते समय अपने नाम के साथ अपनी पहचान बतानी होती है और साथ ही अपने चेहरे की फोटो भी अपलोड करनी होती है। इंटरनेट पर अपनी असली पहचान छिपा कर मौजूद रहने वाले यौनिक अपराधियों की भरमार होने से जुड़ी वास्तविक चिंता के बावजूद इस तरह से एक से ज़्यादा तरह की पहचान बना कर अपनी आयु के अनुरूप जेंडर और यौन व्यवहार करने की बन्दिशों को तोड़ पाने के महत्व को भी पहचाना जाना चाहिए। इन ‘फ़ेक’ कहलाए जाने वाले प्रोफ़ाइल तैयार करने को युवा महिलाओं कि खुद यह निर्धारित करने की कोशिश ही समझना चाहिए कि तमाम तरह के नियंत्रण होने के बाद भी वे सोशल मीडिया का उपयोग किस तरह से करना चाहती हैं। ज़ारा और निहारिका के मामले में, उनके द्वारा ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल बनाना अपनी यौनिक इच्छाओं की अभिव्यक्ति का एक तरीका है। अपना ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल तैयार कर निहारिका ने अपने परिवार द्वारा लगाई गयी जाति बंधन की सीमायों को भी तोड़ने की कोशिश की है। इस तरह से, जहाँ अधिकांश युवा महिलाएँ इंटरनेट पर इन ‘फ़ेक’ पहचान और एक से अधिक पहचान बनाए जाने को लेकर चिंतित होती हैं, वहीं उनमें से कुछ ने इस ऑनलाइन दुनिया में कलपनाशीलता और पहचान द्वारा आनंद पाने की भी कोशिश की है। यौनिक रुझानों और व्यवहारों की अभिव्यक्ति के अलग-अलग तरीकों द्वारा उन्होंने जाति और धर्म की उन दीवारों को भी ध्वस्त करने की कोशिश की है जिसे वे बंधनकारी समझती हैं। पहचान को इस तरह ‘फ़ेक’ और ‘असली’ कहकर संबोधित करना एक तरह से स्वीकृत अथवा मान्य और अस्वीकृत अथवा अमान्य यौनिकता के बीच, ‘सुरक्षित और ‘जोखिम भरी’ पहचान के बीच, या सम्मानजनक व्यवहार और यौन इच्छाओं के प्रदर्शन के बीच के अंतर की तरह है। सोशल मीडिया पर आजकल उन लोगों के उन प्रोफ़ाइल को बंद करने की कवायद चल रही है जिनमें लोग अपनी पहचान ज़ाहिर करने के लिए ज़रूरी फोटो नहीं देते[4] या अपना नाम नहीं बताते। नियंत्रण बनाए रखने कि इस कोशिश को न केवल लोगों की सुरक्षा बनाए रखने की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जाना चाहिए बल्कि इसे, सोशल मीडिया का प्रयोग कर जेंडर, यौनिकता और उम्र की सीमायों को तोड़ने की कोशिशों को दबाने के प्रयास के रूप में भी देखा जाना चाहिए।      

ऊपर दिए गए विवरण से ऐसा आभास होता है कि युवा महिलाओं को ऑनलाइन दुनिया में यौन शोषण के प्रति संवेदनशील मान लिए जाने का परिणाम यह होता है कि हम इन युवा महिलाओं द्वारा खुद अपनी यौनिकता अभिव्यक्त करने के लिए किए जाने वाले ऑनलाइन प्रयोगों के बारे में सोच पाने या जानने का अवसर ही नहीं मिलता। इंटरनेट की ऑनलाइन दुनिया में पुरुषों को ‘फ़ेक’ प्रोफ़ाइल तैयार कर भोली-भाली युवा महिलाओं को गुमराह करने वाले यौन शिकारियों के रूप में चित्रित कर देने से यह भी पता चलता है कि हमें युवा महिलाओं द्वारा ऑनलाइन माध्यमों पर अपनाए जाने वाले विविध व्यवहारों के बारे में कितनी कम जानकारी है। इससे प्रचलित विचारधारा में युवा महिलाओं की यौनिकता चित्रण के बारे में भी पता चलता है कि कैसे महिलाओं को भोली-भाली, निरीह, संवेदनशील, सहनशील, निष्क्रिय और शक्तिविहीन माना जाता है। इसलिए ऑनलाइन माध्यमों का अध्यन्न करते हुए हमारा ध्यान अब केवल नैतिक उल्लंघनों और सुरक्षात्मक रवैये से हटकर युवा महिलाओं की यौनिक की आत्म चेतना को पहचानने की ओर होना चाहिए। ऑनलाइन माध्यमों पर खुद अपनी भागीदारी में और अपने दोस्तों के साथ बातचीत के दौरान मुझे अनेक ऐसे ऑनलाइन अवसरों की जानकारी हुई है जिनके जरिए अनेक तरह की यौन पहचानो, व्यवहारों के अवसर उपलब्ध हैं। इनमें न केवल एक दूसरे को लिख कर संदेश भेजे जा सकते हैं बल्कि कई और तरीकों से भावमय रूप में अपनी इच्छाएँ, अपने विचार प्रकट और ग्रहण किए जा सकते हैं। किन्तु फिर भी, बीस युवा महिलाओं के साथ बातचीत करने पर, केवल महिलाओं ने मुझे इंटरनेट पर अपने उन व्यवहारों की जानकारी दी जो प्रचलित विचारधारा में उपयुक्त यौन व्यवहारों की परिधि से बाहर समझे जाते हैं। हालांकि मेरी कोशिश यही रही है कि मैं इन महिलाओं द्वारा खुद से बताई गयी बातों पर ही अपना ध्यान सीमित रखूँ, फिर भी मुझे ऐसा लगता है कि उपयुक्त और अनुपयुक्त जेंडर व यौन व्यवहारों के बारे में निषिद्ध इस अध्ययन में अनेक कहानियाँ ऐसी भी हैं जो अभी बताई नहीं गयी हैं और शायद सामने नहीं आ पायीं हैं। युवा महिलाओं द्वारा अपनी पहचान, जेंडर अभिव्यक्ति और यौनिक आत्मचेतना के बारे में पूरी संभावनाओं का आंकलन करना इसलिए कठिन है। युवा महिलाओं द्वारा टेक्नालजी के प्रयोग द्वारा अपनी यौनिकता की अभिव्यक्ति के विभिन्न आयामों को समझने के प्रति अधिक गहरी प्रतिबद्धता से अध्यन्न किया जाना वाकई एक रुचिकर और अध्यन्न साबित हो सकता है। 

 

[1] URL : http://mtv.in.com/webbed/

इस टेलिविजन कार्यक्रम के विवरण में कहा गया है, ‘इंटरनेट नए दोस्त बनाने के लिए बेहतरीन जगह है; लेकिन पहचानहीन शिकारियों के लिए यह जगह उससे भी बेहतर है’। 

[2] क्राइम पैट्रोल कार्यक्रम का यू-ट्यूब चैनल 

[3] पहचान गुप्त रखने के लिए नाम बदल दिए गए हैं।

[4] सितंबर 2014 में, फ़ेसबुक ने बहुत से एकाउंट यह कहते हुए बंद कर दिए थे कि इनमें सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले लोगों ने अपने असली नाम न बता कर उनके सही नाम जानने की नीति का उल्लंघन किया था। ऐक्टिविस्ट्स ने इसका विरोध किया और कहा कि इस तरह से एकाउंट बंद करना, ड्रैग किंग और ड्रैग क्वीन सहित LGBTQ समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव करने जैसा है। इस बारे में अधिक पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।  

सोमेन्द्र कुमार द्वारा अनुवादित 

To read this article in English, please click here

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Article written by:

Currently doing her M.Phil in Women's Studies from the Tata Institute of Social Sciences, Mumbai and working part-time as a writer at Partners for Urban Knowledge, Action and Research. Her research interests include feminist activism, social media, girlhood studies, popular culture and constructions of femininity.

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