A digital magazine on sexuality in the Global South

Author: Sumati Panikkar

silhouette of a woman standing alone in a valley

‘हामी भरने’ या ‘मना करने’ का मेरा अधिकार

मनुष्यों के बीच के किसी भी तरह के आपसी सम्बन्धों में सहमति का होना, इन सम्बन्धों की मज़बूत नींव की तरह होना चाहिए। हमारे समाज में हम इस ‘सहमति’ देने या ‘ना’ कह पाने के अधिकार पर प्रतिक्रिया के रूप में नयी तरह की हिंसा को देख पा रहे हैं। अधिकारों को प्रयोग करने की इस प्रक्रिया को केवल किसी व्यक्ति द्वारा अपने अधिकारों के प्रयोग के रूप में न देखकर इसे सभी के लिए सामूहिक रूप से किए जा रहे अधिकारों के प्रयोग के रूप में देखा और समझा जाना चाहिए।
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