A digital magazine on sexuality in the Global South

Author: Nirantar

बाल विवाह

बाल और जल्द विवाह पर एक विश्लेषण

कम उम्र में विवाह और बाल विवाह एक बेहद विखंडित और असमान समाज का लक्षण है। जब भी यह पूछा गया कि लोग अपने बच्चों की कम उम्र में शादी क्यों करते हैं तो “दहेज़”, “गरीबी” और “यौन हिंसा का डर” आदि कारण सबसे ज़्यादा सुनाई दिए।
सावित्रीबाई फुले का समाज से संघर्ष

उन्नीसवीं सदी का महाराष्ट्र और सावित्रीबाई फुले

आज के महाराष्ट्र में महिलाओं की स्थिति और उन्नीसवीं सदी की महिलाओं की स्थिति में बहुत अंतर है और इस अंतर के लिए, आज के महाराष्ट्र के लिए, और महिलाओं की आज की बेहतर स्थिति के लिए सावित्रीबाई फुले जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं का योगदान अतुलनीय है। सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस (३ जनवरी) के अवसर पर उनके योगदान को याद करते हुए लेखक ने उन्नीसवीं सदी के महाराष्ट्र और उसकी महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला है।
Illustration of a woman with boy-cut hair sitting on a motorcycle. She is wearing tee shirt and jeans.

ड्रैग और क्रॉस ड्रेसिंग के कई रंग

निरंतर से ऐनी और नीलिमा द्वारा यह बात लगभग दो हफ्ते पहले गाँव पठा, ललितपुर जिला, महरौनी ब्लॉक के सूचना केंद्र की है। निरंतर में काम कर रही नीलिमा वहाँ सहजनी शिक्षा केंद्र[1] टीम के साथ असाक्षर और नव-साक्षर औरतों के साथ भाषा के बारे में सत्र कर रहीं थी। “सत्र के दौरान दो औरतों की सास…
Black and white drawing of a young boy whistling. Around him is written "drugs", "alcohol", "love affair", "dirty jokes", "cigarettes", "AIDS" in clockwise direction. With each of these words is drawn a representation of that word.

Review: Sexuality in Moral Science and Adolescent Education Textbooks

Textbook Regimes: A Feminist Critique of Nation and Identity is a book published by Nirantar that explores the linkages between nationalism, identity and gender in school textbooks. The study attempts to understand the politics of school textbooks, moving beyond standard techniques of addressing gender.This feminist critique uses power as a key concept to analyse how…
Photo of a woman in a pride parade, holding up a small queer pride flag

और जन्म हुआ गज़ल का !

तारशी की ईमैगज़ीन इन प्लेनस्पीक में हम इस महीने ‘बॉडी इमेज’ या शारीरिक छवि पर बात करेंगे। बॉडी इमेज वह है जो व्यक्ति अपने शरीर के बारे में सोचते हैं  - जो इस धारणा (अक्सर समाज द्वारा प्रेरित) पर आधारित है कि उन्हें अपने शरीर के बारे में क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं।…
Photo of a woman in a pride parade, holding up a small queer pride flag

और जन्म हुआ गज़ल का !

पंजाब में रहने वाला गुनराज बचपन से ही प्यारा सा शर्मीला बच्चा था। अक्सर उसे लगता था कि इस दुनिया में वह ही एक मात्र ऐसा लड़का होगा जिसे लगता है कि वह एक लड़की है। जितना भी उसे उसके परिवार वाले या उसके दोस्त लड़के के रूप में देखते थे, उतना ही उसे लगता था कि वह लोग गलत हैं, क्योंकि वह तो एक लड़की है।
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